नई दिल्ली /द्रष्टा डेस्क। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने मंगलवार को लोकभा में मोदी सरकार पर करारा वार किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी पर टिपण्णी करते हुए नसीहत भी दिया। प्रियंका गांधी ने कहा कि युवाओं कि भलाई के लिए प्रधानमंत्री जी को कैमरे का एंगल नहीं, दिल का एंगल बदलना पड़ेगा।
उन्होंने का कहा कि आज मैं इस पवित्र सदन में देश के करोड़ों युवाओं, छात्रों और उनके अभिभावकों की पीड़ा और आवाज़ बनकर खड़ी हुई हूँ। हमारे देश का युवा दिन-रात एक करके मेहनत करता है, सालों-साल परीक्षाओं की तैयारी करता है, ताकि वह अपने और अपने परिवार के सपनों को पूरा कर सके। लेकिन आज उसी युवा का देश की शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था से भरोसा पूरी तरह डगमगा चुका है।
मैं सरकार से सीधा सवाल पूछना चाहती हूँ—
क्या अपने भविष्य और अधिकारों के लिए आवाज़ उठाना अपराध है?
क्या देश के छात्र और युवा आतंकवादी हैं कि उन पर इस तरह का बर्ताव किया जाता है?
उन्होंने पेपर लीक का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सिर्फ कांग्रेस ही नहीं, बल्कि पूरा देश पूछ रहा है कि उन्हें छात्रों की आवाज दबाने का हक किसने दिया। प्रियंका गांधी ने कहा कि छात्रों को देश की शिक्षा व्यवस्था पर भरोसा नहीं रहा। 20 मार्च को जंतर-मंतर पर छात्रों के साथ हुई बर्बरता पर भी प्रियंका गांधी ने मोदी सरकार को सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि क्या संसद पर प्रदर्शन करने वाले छात्र आतंकवादी थे, जो उनपर गोलियां चलाईं और लाठियां बरसाईं गईं। कांग्रेस सांसद ने इसपर पीएम मोदी से जवाब मांगा।
क्या बोलीं प्रियंका गांधी?
प्रियंका गांधी ने कहा- ”देश के युवाओं पर पैलेट गन और एके-47 चलाने की क्या जरूरत थी?
क्या वो आतंकवादी थे?
पैलेट गन का इस्तेमाल करने का आदेश किसने दिया?
क्या वो प्रधानमंत्री थे? क्या ये गृह मंत्री थे?
उन्हें जवाब देना होगा । पूरा देश पूछ रहा है। ये सिर्फ कांग्रेस पार्टी नहीं है , पूरा देश जवाब मांग रहा है।”
आज हम सदन में एक ऐसे विधेयक संशोधन पर चर्चा कर रहे हैं, जो 2024 में पारित हो चुका था। इसमें मुख्य संशोधन यही है कि पेपर लीक के अपराधियों के लिए सजा बढ़ाई जाएगी, लेकिन जब से ये विधेयक पारित हुआ है सरकार ने एक भी अपराधी को सजा नहीं दी। देश देख रहा है कि फेस रिकग्निशन के जरिए प्रदर्शन करने वाले बच्चों के नाम सार्वजनिक किए जा रहे हैं, लेकिन यही काम पेपर लीक के अपराधियों के लिए नहीं किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सच्चाई से बहुत दूर हो चुके हैं।
सिर्फ़ नई-नई कमेटियाँ बना देने से, सिर्फ़ कागज़ों पर नियम बदल देने से या बड़े-बड़े विज्ञापनों से युवाओं का भविष्य नहीं सुधरने वाला। आज देश के तंत्र को ज़मीनी सच्चाई देखने की ज़रूरत है। दिखावे और प्रचार की राजनीति अब नहीं चलेगी।
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मैं स्पष्ट शब्दों में कहना चाहती हूँ—
“प्रधानमंत्री जी को अब कैमरे का एंगल नहीं, अपने दिल का एंगल बदलना पड़ेगा!”
जब तक सरकार की नीयत में संवेदनशीलता और दिल में युवाओं के प्रति सहानुभूति नहीं होगी, तब तक इस देश के छात्रों का दर्द समझ पाना नामुमकिन है। सरकार को अपनी प्राथमिकताएँ तय करनी होंगी—कैमरे की जगमगाहट से बाहर निकलकर देश के युवाओं के आंसुओं और उनकी आँखों के संघर्ष को देखना होगा।
जहां राधाकृष्णन कमेटी की आज तक एक भी सिफारिश लागू नहीं हुई है, वहीं नई कमेटी में एक पूर्व IB चीफ, एक आईटी कंपनी के मालिक और एक गौ-मूत्र विशेषज्ञ भी हैं।देश का युवा आज भाषण नहीं, जवाब माँग रहा है। उसे पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था चाहिए, रोज़गार चाहिए और एक सुरक्षित भविष्य चाहिए।
बयान पर लोकसभा में हंगामा
प्रियंका गांधी की प्रह्रलाद जोशी के पुराने बयान पर टिप्पणी को लेकर लोकसभा में हंगामा हो गया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि शिक्षा मंत्री को लेकर उनका बयान पूरी तरह गलत है और उन्हें इसके लिए माफी मांगनी होगी। उन्होंने कहा कि ये एक तरीके से शिक्षा मंत्री के चरित्र का हनन है, इसे रिकॉर्ड से हटाया जाय।
रिजिजू ने कहा कि संसद में डिबेट के स्तर को ना गिराएं। प्रियंका गांधी के बयान पर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने उन्हें इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करने से रोका। जिसके बाद प्रियंका गांधी ने आगे कहा- ”केंद्र सरकार ने हमारे शिक्षा तंत्र को RSS प्रचारकों से भरकर उसे खोखला कर दिया है। NTA को ज़बरदस्ती लागू करके और सिस्टम को सेंट्रलाइज़ करके उन्होंने हालात को और भी मुश्किल बना दिया है। देश के कुल बजट में शिक्षा बजट का हिस्सा हर साल बढ़ने के बजाय असल में घट रहा है।”


