गणतंत्र का धर्म और श्रीराम की इच्छा

आज भारत की राजनीति प्रथा और परम्पराओं वाले धर्म की बैशाखी पर लंगड़ा रही है। धर्म की इसी बैसाखी का विरोध युगद्रष्टा सरदार भगत सिंह ने किया था। जब राजनीति, धर्म की बैसाखी के सहारे चल रही हो तो, गण और तंत्र का टकराव निश्चित है।