सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय, छात्र प्रदर्शनों से जुड़ी देशभर की FIRs की रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने NEET-2026 में गड़बड़ी के चलते सुसाइड करने वाले छात्रों के परिजनों को तीन महीने में प्रक्रिया तय कर मुआवजा का भुगतान करने का आदेश दिया । कोर्ट ने कहा कि 142 का इस्तेमाल इस शर्त पर है कि दोनों पक्ष अपने कमिटमेंट पर टिके रहेंगे।

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए देश भर में छात्र प्रदर्शनों से जुड़ी सारी FIR रद्द करने का फैसला किया है। सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत अपने असाधारण अधिकार का प्रयोग करते हुए ये फैसला सुनाया। सर्वोच्च अदालत ने 20 से 25 जुलाई के बीच छात्र प्रदर्शन पर दर्ज सभी FIR रद्द करने का आदेश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने छात्र प्रदर्शनों के संबंध में देशभर के किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में दर्ज FIRs को आगे न बढ़ाने और उनकी जांच न करने का आदेश देते हुए कोर्ट ने इन मामलों को सभी उद्देश्यों के लिए बंद माना है। CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की खंडपीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए यह आदेश दिया।

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कोर्ट ने केंद्र (दिल्ली पुलिस), बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और असम द्वारा दायर आवेदनों में चिन्हित FIRs को भी रद्द कर दिया। साथ ही, किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश को 20-25 जुलाई के प्रदर्शनों से संबंधित नई FIR दर्ज नहीं करने का निर्देश दिया।

हालांकि, दिल्ली पुलिस को जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़े 2,873 लोगों के खिलाफ एक FIR में जांच जारी रखने की अनुमति दी गई है। केंद्र ने बताया था कि इनमें गंभीर आपराधिक मामलों वाले लोग शामिल हैं। कॉकरोच जनता पार्टी ( CJP ) ने 5 सितंबर का प्रदर्शन वापस लिया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि FIRs वापस लेने का कदम केंद्र सरकार द्वारा 25 जुलाई को CJP नेताओं को दिए गए आश्वासन के तहत उठाया गया है।

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सुप्रीम कोर्ट ने NEET-2026 में गड़बड़ी के चलते सुसाइड करने वाले छात्रों के परिजनों को तीन महीने में प्रक्रिया तय कर मुआवजा का भुगतान करने का आदेश दिया । कोर्ट ने कहा कि 142 का इस्तेमाल इस शर्त पर है कि दोनों पक्ष अपने कमिटमेंट पर टिके रहेंगे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में मौजूद CJP प्रवक्ता सौरव दास ने घोषणा की कि 5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन वापस लिया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देशभर में प्रदर्शन करने वाले bona fide छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए यह व्यापक आदेश पारित किया गया है।

 

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