नई दिल्ली (एजेंसी ) होर्मुज स्ट्रेट खुलवाने के लिए ब्रिटेन की ओर से बुलवाई गई ग्लोबल समिट में भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी शामिल हुए। बैठक में भारत समेत 60 से ज्यादा देशों ने हिस्सा लिया था। विदेश सचिव सचिव विक्रम मिसरी ने नेविगेशन की स्वतंत्रता और ऊर्जा सुरक्षा के सवाल को उठाया और साथ ही जोर देकर कहा कि खाड़ी हमलों में भारतीय नाविकों की मौत हुई और भारत को नुकसान हुआ है। इसके साथ ही उन्होंने तनाव कम करने के लिए कूटनीति पर जोर दिया।
बता दें, सभी देशों के प्रतिनिधि इस बैठक में वर्चुअल तौर पर जुड़े थे। हालांकि, गौर करने वाली बात यह है कि इस बैठक में अमेरिका शामिल नहीं हुआ। बुधवार को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने इस ग्लोबल समिट को लेकर कहा था। इससे एक दिन पहले ट्रंप ने सीधे तौर पर ब्रिटेन को दो टूक लहजे में कहा था कि अगर ब्रिटेन इस युद्ध में अमेरिका का साथ नहीं देता, तो भविष्य में अमेरिका उसकी कोई मदद नहीं करेगा।
ट्रंप ने तंज कसते हुए कहा था कि ब्रिटेन को अगर होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते तेल लेना है तो वह खुद वहां जाकर उसे खुलवाएं। उन्होंने साथ ही कहा था कि अगर होर्मुज नहीं खुलवा सकते तो अमेरिका से तेल खरीद सकते हैं। ट्रंप के इस बयान का जवाब देते हुए अगले दिन पीएम स्टार्मर ने कहा कि ये हमारा युद्ध नहीं है और होर्मुज स्ट्रेट खुलवाने के लिए ग्लोबल समिट करेंगे।
होर्मुज स्ट्रेट का महत्त्व ?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया की इकॉनमी के लिए बहुत जरूरी है। दुनिया की 20% एनर्जी सप्लाई इसी संकरे रूट से होकर गुजरती है। इस रूट को ईरान ने अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद बंद कर दिया था। ईरान ने किसी भी ऑयल टैंकर को यहां से नहीं निकलने दिया। जिसकी वजह से करीब 2000 टैंकर यहां फंसे हुए हैं। हालांकि, कुछ देशों के टैंकरों को बिना किसी रुकावट के आने जाने दिया गया। इनमें भारत के भी कुछ टैंकर शामिल हैं। भारत की बात करें तो लगभग 40% क्रूड ऑयल, 50% लिक्विफाइड नेचुरल गैस, और 80% से ज्यादा लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) इसी रास्ते से होकर आता है।


