– अपने किसानों पर दिए बयान के कारण थप्पड़ खा चुकी है सांसद कंगना रनौत
– कंगना के बड़बोलेपन से डरी बीजेपी ने कंगना रनौत को विवादित बयानों से बचने का दिया निर्देश
नई दिल्ली। फालतू बकर -बकर बयानबाज़ी करने वाली कंगना रनौत के मुँह पर भारतीय जनता पार्टी के आलाकमान ने ताला लगा दिया है। बीजेपी के उच्च नेतृत्व ने मंडी से सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत को स्पष्ट हिदायत दी है कि वे पार्टी की आधिकारिक लाइन से हटकर अनर्गल बयानबाजी न करें।
सूत्रों के मुताबिक, हाल के कुछ विवादास्पद टिप्पणियों के बाद बीजेपी अध्यक्ष जे.पी. नड्डा समेत आलाकमान ने अभिनेत्री से सांसद बनी कंगना रनौत को चुप रहने और संवेदनशील मुद्दों पर बिना अनुमति बयान न देने की सख्त चेतावनी दी है। पार्टी के केंद्रीय मीडिया विभाग ने एक प्रेस विज्ञप्ति में साफ कहा, “कंगना रनौत पार्टी की नीतियों पर बयान देने के लिए अधिकृत नहीं हैं। उनका कोई भी ऐसा बयान पार्टी का आधिकारिक मत नहीं माना जाएगा।” यह निर्देश मुख्य रूप से किसान आंदोलन, जाति जनगणना और हालिया छात्र प्रदर्शनों जैसे मुद्दों पर उनके बयानों के बाद आया है, जिन्होंने पार्टी को राजनीतिक नुकसान पहुंचाया था।
बड़बोली है कंगना रनौत के विवादित बयान
कंगना रनौत, जो 2024 के लोकसभा चुनाव में हिमाचल प्रदेश की मंडी सीट से सांसद चुनी गईं, अपनी खुली बयानबाजी के लिए जानी जाती हैं।
1- कंगना ने एक इंटरव्यू में दावा किया कि 2020-21 के किसान आंदोलन के दौरान “लाशें लटकी हुई थीं, बलात्कार हो रहे थे” और “बांग्लादेश जैसी अराजकता” पैदा करने की साजिश थी।
प्रभाव: पंजाब-हरियाणा में तीखी प्रतिक्रिया। बीजेपी को खुद को इससे अलग करना पड़ा। पार्टी ने कहा कि यह उनका व्यक्तिगत बयान है, पार्टी का नहीं। नड्डा ने तलब कर हिदायत दी।
2- कंगना ने बाद में कहा कि वापस लिए गए कृषि कानूनों को फिर से लागू किया जाना चाहिए और किसान खुद इसकी मांग करें। फिर पार्टी ने दूरी बनाई। यह बयान पार्टी की आधिकारिक स्थिति के विपरीत था, जिससे अनुशासन की कमी उजागर हुई।
3-ट्रंप के भारत में एप्पल विस्तार पर टिप्पणी के जवाब में कंगना ने “ईर्ष्या” और “कूटनीतिक असुरक्षा” का जिक्र किया। नड्डा के निर्देश पर ट्वीट डिलीट कर माफी मांगी। विदेश नीति जैसे संवेदनशील क्षेत्र में व्यक्तिगत राय देना राजनयिक संबंधों को प्रभावित कर सकता था।
4-20 जुलाई के दिल्ली छात्र प्रदर्शन पर कंगना ने इसे “हुड़दंग” बताया और कहा कि संसद में सुरक्षा उल्लंघन हुआ, लेकिन सरकार पर दबाव नहीं बनना चाहिए। इस बयान ने विपक्ष को हमला करने का मौका दिया, हालांकि यह बीजेपी लाइन के अनुरूप था।
सूत्र बताते हैं कि जे.पी. नड्डा ने कंगना को व्यक्तिगत रूप से तलब किया और लगभग आधे घंटे तक बैठक की। बैठक में उन्हें सलाह दी गई कि वे केवल पार्टी की आधिकारिक लाइन पर फोकस करें। जैसे मोदी सरकार की उपलब्धियां, महिला सशक्तिकरण आदि और बाकी मुद्दों पर चुप्पी साधे रखें। पार्टी ने स्पष्ट किया कि कंगना हर मुद्दे पर बयान देने वाली आधिकारिक प्रवक्ता नहीं हैं।
बीजेपी की चिंता और रणनीति
बीजेपी आलाकमान की यह हिदायत चुनावी राज्यों और राष्ट्रीय राजनीति में अनावश्यक विवादों से बचने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। कंगना की बयानबाजी अक्सर विपक्ष को हमला करने का मौका दे देती है, खासकर पंजाब-हरियाणा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में जहां किसान और सिख समुदाय प्रभावित होते हैं।
कंगना पर पाबंदियां
कंगना को मीडिया इंटरव्यू के लिए पूर्व अनुमति लेनी होगी।
कार्यक्रमों में वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी अनिवार्य।
केवल एक-दो लाइन के बयान देने की सलाह।
यह कदम कंगना को “पार्टी की संपत्ति” बनाए रखते हुए उनके विवादास्पद स्वभाव को नियंत्रित करने की कोशिश है।
कंगना का रुख
अभी तक कंगना रनौत ने इस हिदायत पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। वे पहले भी ऐसी सलाहों के बाद सोशल मीडिया पर सक्रिय रह चुकी हैं, लेकिन पार्टी लाइन का पालन करने का दावा करती रही हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस ने इसे बीजेपी के आंतरिक नियंत्रण की नाकामी बताते हुए तंज कसा है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि “बीजेपी अपनी ही सांसद को चुप करा रही है, क्योंकि उनकी बयानबाजी पार्टी की छवि खराब कर रही है।”
राजनीतिक फायदा
बीजेपी के लिए कंगना एक दोधारी तलवार हैं। लोकप्रियता बढ़ाती हैं लेकिन अनियंत्रित बयान पार्टी की छवि और चुनावी रणनीति को नुकसान पहुंचाते हैं। आलाकमान की हिदायत पार्टी अनुशासन की याद दिलाती है। कई मौकों पर पार्टी को डैमेज कंट्रोल करना पड़ा। विपक्ष इसे “बीजेपी में असहमति का दमन” बताकर राजनीतिक फायदा उठाता है।
कंगना की टिप्पणियां सोशल मीडिया पर ध्रुवीकरण बढ़ाती हैं। कुछ बयान समुदायों के बीच तनाव पैदा करते हैं। कंगना रनौत की बयानबाजी उनकी व्यक्तिगत ब्रांडिंग का हिस्सा है, लेकिन सांसद के रूप में यह पार्टी दायित्व से जुड़ा है। बीजेपी की हालिया हिदायत स्पष्ट संदेश है। व्यक्तिगत स्वतंत्रता पार्टी हितों के अधीन रहेगी।
आगे देखना होगा कि कंगना इस निर्देश का कितना पालन करती हैं और क्या यह उनकी राजनीतिक यात्रा को प्रभावित करेगा। एक तरफ वे युवा और महिला वोट बैंक को आकर्षित करती हैं, दूसरी तरफ विवाद खड़े कर देती हैं। बीजेपी आलाकमान का यह कदम आगामी चुनावी रणनीति और पार्टी की एकजुटता को मजबूत करने की दिशा में माना जा रहा है। आगे देखना होगा कि कंगना इस हिदायत का कितना पालन करती हैं।


