मध्य प्रदेश में भ्रष्ट अधिकारियों ने सड़ा डाला 22 हजार मीट्रिक टन गेहूं

इस गेंहूं को बचाने के लिए बेईमान अधिकारियों ने किराया, रखरखाव, परिवहन और कीटनाशक छिड़काव पर 150 करोड़ रुपये खर्च कर दिया। अब यह अनाज पशुओं के चारे के लायक भी नहीं बचा है।

DrashtaNews

सीहोर। मध्य प्रदेश के रायसेन में भ्रष्ट अधिकारियों की काली करतूतें सामने आ रही हैं। गौहरगंज ओबेदुल्लागंज के ग्राम दिवाटिया के सरकारी वेयरहाउस में रखा लगभग 35 करोड़ रुपये का 22 हजार मीट्रिक टन गेहूं पूरी तरह सड़ गया है। इस गेंहूं को बचाने के लिए बेईमान अधिकारियों ने किराया, रखरखाव, परिवहन और कीटनाशक छिड़काव पर 150 करोड़ रुपये खर्च कर दिया। अब यह अनाज पशुओं के चारे के लायक भी नहीं बचा है।
किसान नेता राहुल गौर ने बताया, यह गेहूं सन 2017-18 में बकतरा में तुला था। 2022 में सीहोर जिले के बकतरा से रायसेन जिले के नूरगंज और दिवाटिया वेयरहाउस में शिफ्ट किया गया था। खास बात ये कि उस समय ही यह अफसरों ने बता दिया था कि ये गेहूं खराब है। लंबे समय तक अनाज को खुले में या अनुचित तरीके से रखने के कारण नमी और कीटों ने इसे पूरी तरह बर्बाद कर दिया।
बचाव के लिए 34 बार हुआ कीटनाशक का छिड़काव
वेयरहाउस कॉरपोरेशन औबेदुल्लागंज के प्रबंधक सीएस डूडवे के अनुसार, बचाव के प्रयास में करीब 34 बार कीटनाशक छिड़काव किया गया, लेकिन इससे स्थिति और खराब हुई। अब यह गेहूं तेज दुर्गंध फैला रहा है और इसे किसी भी उपयोग में लाया जाना असुरक्षित माना जा रहा है। इसे जानवरों को भी नहीं दिया जा सकता है।
जब 2022 में ही नूरगंज और दिवाटिया वेयरहाउस में गेहूं खराब हो रहा था, तब प्रशासन ने इसे रखने की अनुमति कैसे दी? सीहोर से रायसेन शिफ्ट करने के पीछे किसकी मिलीभगत थी और किसके दबाव में यह फैसला लिया गया? रखरखाव के नाम पर इतना भारी खर्च करने के बावजूद अनाज को बचाने में नाकामी क्यों हुई? यह सरकारी खजाने की बर्बादी का स्पष्ट मामला है, जहां गरीबों के राशन और किसानों की मेहनत का अनाज सड़ गया।

ओबेदुल्लागंज तहसीलदार नीलेश सरवटे नायब ने बताया कि मामले की विस्तृत जांच होगी। उसके बाद जो निर्देश होगा, वो किया जाएगा। तहसील के सभी वेयर हाउस को चेक किया जा रहा है कि कहीं और गेहूं खराब तो नहीं हो रहा है।

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