नई दिल्ली। अमेरिका की टेक कंपनी ओरेकल (Oracle) में बड़े स्तर पर छंटनी कर दी गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुनियाभर में 20,000 से 30,000 तक कर्मचारियों की नौकरी जा सकती है। यह कंपनी के कुल कर्मचारियों का करीब 18% हिस्सा है। कंपनी ने इतनी बड़ी छंटनी की है, जिससे इस कंपनी में काम कर रहे लगभग 12 हजार भारतीय कर्मचारियों की नौकरी चली गई है और ये संख्या और बढ़ सकती है। कर्मचारियों को अचानक ईमेल के जरिए नौकरी खत्म होने की जानकारी दी गई। न कोई पहले चेतावनी, न मैनेजर से बात सीधे मेल में बताया गया कि उसी दिन उनका आखिरी काम का दिन है।
ओरेकल में बड़े स्तर पर छंटनी
इस मेगा टेक कंपनी ने इतनी अधिक छंटनी क्यों की है, अब इस पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि ये छंटनी AI ऑटोमेशन के चलते हो सकती है। खबरें हैं कि ओरेकल ने ग्लोबली करीब 30 हजार लोगों को निकाल दिया है। नौकरी से निकालने का मेल आज सुबह 6 बजे कर्मचारियों को मिला। इस मेल में लिखा था कि ये कदम बड़े बदलाव का हिस्सा है, कई लोगों के रोल को खत्म किया जा रहा है।
ओरेकल में छंटनी क्यों की गई
सोशल मीडिया पर दावे हैं कि कंपनी ने ये कदम एआई ऑटोमेशन के कारण उठाया है।अब उनका फोकस है AI के जरिए अधिक से अधिक काम करवाना। दुनिया भर की बड़ी कंपनियों में ये ट्रेंड तेजी से बढ़ा है। कहा जा रहा है कि AI कोड लिखने और टेस्टिंग तक में परफेक्ट हो रहा है। इसके अलावा वो ऐसे कई काम कर रहा है जो अब तक किसी बड़ी कंपनी में इंसान करते थे जैसे कस्टमर सपोर्ट। इसमें भी चैटबॉट्स जवाब दे रहे हैं। वहीं खबरें ये भी हैं कि कंपनी अपने खर्च को कम करना चाह रही थी। यानी कॉस्ट कटिंग के लिए ये किया गया है। साथ ही कंपनी अपने बिजनेस स्ट्रक्चर को बदलने की कोशिश कर रही है।
साइन किए बिना नहीं मिलेगा सेवरेंस
छंटनी से प्रभावित कर्मचारियों को मुआवजा पाने के लिए एक शर्त रखी गई है। उन्हें डॉक्यूसाइन के जरिए भेजे गए टर्मिनेशन डॉक्यूमेंट पर साइन करना होगा, तभी उन्हें पैसा मिलेगा।
कई कर्मचारियों को ईमेल सुबह 6 बजे (भारत समय) और अमेरिका में रात 3 बजे भेजा गया। इसके तुरंत बाद कई लोगों की कंपनी के सिस्टम तक पहुंच भी बंद कर दी गई।
अमेरिका में कर्मचारियों को पहले साल के लिए 4 हफ्ते की सैलरी और उसके बाद हर साल के लिए 1 हफ्ते की सैलरी दी जा रही है, जिसकी अधिकतम सीमा 26 हफ्ते है।
अन्य कंपनियों से कम पैकेज
ओरेकल का यह पैकेज अन्य टेक कंपनियों की तुलना में कम बताया जा रहा है। हाल ही में कुछ कंपनियों ने ज्यादा सैलरी, हेल्थ इंश्योरेंस और अन्य सुविधाएं दी थीं, जबकि ओरेकल के पैकेज में ऐसी अतिरिक्त सुविधाएं नहीं हैं।
भारत में कर्मचारियों के लिए सामान्य N+2 फॉर्मूला लागू होने की संभावना है, यानी जितने साल काम किया, उतने महीने की सैलरी के साथ 2 महीने अतिरिक्त दिए जाएंगे। हालांकि, अनवेस्टेड RSU (शेयर) पूरी तरह खत्म कर दिए जाएंगे।
कई बड़ी कंपनियों में छंटनी
बता दें कि ओरेकल में आज हुई छंटनी से पहले कई और बड़ी कंपनियां छंटनी कर चुकी हैं। जिसमें गूगल, मेटा, अमेजन जैसी दिग्गज टेक कंपनियां शामिल हैं।
AI निवेश के लिए बढ़ा आर्थिक दबाव
रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी इस छंटनी के जरिए 8 से 10 अरब डॉलर तक की बचत करना चाहती है। यह पैसा AI इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में लगाया जाएगा। पिछले दो महीनों में कंपनी ने करीब 58 अरब डॉलर का कर्ज लिया है और सितंबर 2025 से उसके शेयर की कीमत आधे से ज्यादा गिर चुकी है। कई अमेरिकी बैंकों ने भी इसके प्रोजेक्ट्स को फंड करने से पीछे हटना शुरू कर दिया है। छंटनी का असर कंपनी के कई विभागों जैसे क्लाउड, सेल्स, कस्टमर सक्सेस और नेटसूट पर पड़ा है।
कर्मचारियों पर पड़ा मानसिक असर
छंटनी का असर कर्मचारियों पर मानसिक रूप से भी पड़ा है। कंपनी के एक पूर्व सॉफ्टवेयर मैनेजर हृषिकेश नर्ष ने बताया कि 16 साल की नौकरी अचानक खत्म हो गई। उन्होंने कहा कि अब भी उन्हें ऐसा लगता है जैसे वह अपने पुराने काम की योजना बना रहे हैं, लेकिन अब वह उनकी जिम्मेदारी नहीं रही।


