अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को सत्ता से बेदखल करने की उलटी गिनती शुरू

अमेरिकी संविधान का 25वां संशोधन असल में राष्ट्रपति के पद को लेकर पैदा होने वाले शून्य को भरने के लिए बनाया गया था। साल 1963 में राष्ट्रपति जॉन एफ. केनेडी की हत्या के बाद 1967 में इसे पारित किया गया।

DrashtaNews

वाशिंगटन। पूरी दुनिया विनाश के कगार पर खड़ी है। ईरान इजराइल और अमेरिका का युद्ध भयानक रूप ले चूका है। इसे लेकर अमेरिकी राजनीति में इस समय जबरदस्त उबाल है।इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक विवादित और सोशल मीडिया पर किए गए बेहद आपत्तिजनक पोस्ट ने न केवल कूटनीतिक मर्यादाएं तोड़ी हैं, बल्कि उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब डोनाल्ड ट्रम्प को सत्ता से बेदखल करने की उलटी गिनती शुरू हो गयी है।
ईरान के साथ जारी युद्ध के बीच ट्रंप की इस सनक ने अमेरिकी संविधान के उस पन्ने को पलटने पर मजबूर कर दिया है, जिसे 25वां संशोधन कहा जाता है। अब मांग उठ रही है कि क्या राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उनकी कुर्सी से बेदखल करने का वक्त आ गया है?

डोनाल्ड ट्रंप ने ईस्टर जैसे पवित्र मौके पर सोशल मीडिया पर एक ऐसा पोस्ट किया, जिसने पूरी दुनिया को सकते में डाल दिया। इस पोस्ट में उन्होंने ईरान को सीधी धमकी दी, लेकिन उसमें इस्तेमाल की गई भाषा बेहद अश्लील और गाली-गलौज से भरी थी। एक देश के सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल अमेरिका की वैश्विक छवि को नुकसान पहुंचा रहा है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह व्यवहार किसी सामान्य और संतुलित मस्तिष्क वाले व्यक्ति का नहीं हो सकता, इसलिए अब उनके पद पर बने रहने की योग्यता जांची जानी चाहिए।

क्या है अमेरिकी संविधान का 25वां संशोधन

अमेरिकी संविधान का 25वां संशोधन (Twenty‑Fifth Amendment) मुख्य रूप से राष्ट्रपति की अक्षमता, उत्तराधिकार और उप‑राष्ट्रपति की नियुक्ति से जुड़ा एक प्रावधान है। इसे 1965 में प्रस्तावित और 1967 में लागू किया गया था, ताकि राष्ट्रपति पद की खाली घोषणा, अचानक अक्षमता या मृत्यु की स्थिति में संवैधानिक क्रम स्पष्ट रहे।
अमेरिकी संविधान का 25वां संशोधन असल में राष्ट्रपति के पद को लेकर पैदा होने वाले शून्य को भरने के लिए बनाया गया था। साल 1963 में राष्ट्रपति जॉन एफ. केनेडी की हत्या के बाद 1967 में इसे पारित किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य यह तय करना है कि यदि राष्ट्रपति की मृत्यु हो जाए, वह इस्तीफा दे दे या अपने काम करने में असमर्थ हो जाए, तो सत्ता का हस्तांतरण कैसे होगा। इस संशोधन में कुल चार धाराएं हैं, जो अलग-अलग स्थितियों में लागू की जाती हैं। राष्ट्रपति अपनी अक्षमता स्वयं स्वीकार न करे तो भी उसे शक्ति से हटाया जा सके।
पहला चरण (उप‑राष्ट्रपति + कैबिनेट)

अगर उप‑राष्ट्रपति और कैबिनेट के बहुमत का विचार हो कि राष्ट्रपति अपने कर्तव्यों को निभाने में अक्षम है, तो वे लिखित घोषणा करते हें कि राष्ट्रपति “अक्षम” है। इस घोषणा के बाद उप‑राष्ट्रपति तुरंत कार्य‑भार‑संचालक राष्ट्रपति बन जाता है।

राष्ट्रपति का विरोध (काउंटर‑क्लेम)

राष्ट्रपति लिखित रूप से कह सकता है कि वह अक्षम नहीं है और शक्तियाँ वापस लेना चाहता है। ऐसा होने पर मामला कांग्रेस के पास जाता है।

कांग्रेस की भूमिका

अगर कैबिनेट का बहुमत और उप‑राष्ट्रपति फिर भी दोबारा लिखित रूप से घोषणा करें कि राष्ट्रपति अक्षम है, तो दोनों सदनों में दो‑तिहाई बहुमत से यह निर्णय पक्का होता है कि राष्ट्रपति अक्षम है। ऐसी स्थिति में उप‑राष्ट्रपति ही कार्य‑भार‑संचालक राष्ट्रपति बना रहता है, जब तक कि: या तो कांग्रेस बहुमत बदलकर राष्ट्रपति की योग्यता फिर से मान ले, या राष्ट्रपति अपने कार्यकाल में वापस लौट आए (इस्तीफ़ा आदि द्वारा)।

सनक और मानसिक स्वास्थ्य पर उठते सवाल

ट्रंप को हटाने की मांग केवल एक पोस्ट की वजह से नहीं हो रही है, बल्कि उनके लगातार बदलते फैसलों और युद्ध की रणनीति में अस्थिरता को लेकर भी है। मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध के बीच ट्रंप का कभी ईरान को धमकाना और कभी पूरी तरह हवाई नियंत्रण का झूठा दावा करना, उनकी विश्वसनीयता को खत्म कर रहा है। सीनेटर क्रिस मर्फी जैसे नेताओं का स्पष्ट कहना है कि यदि वे कैबिनेट में होते, तो अब तक संवैधानिक वकीलों के साथ इस मुद्दे पर बैठक कर चुके होते।

कैबिनेट और उपराष्ट्रपति की भूमिका अहम

25वें संशोधन की सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि इसे लागू करने की पहली चाबी उपराष्ट्रपति के पास होती है। बिना उपराष्ट्रपति की सहमति और हस्ताक्षर के धारा 4 को सक्रिय नहीं किया जा सकता है। अभी तक उपराष्ट्रपति की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन पर्दे के पीछे रिपब्लिकन खेमे में भी असंतोष के सुर सुनाई देने लगे हैं। यदि राष्ट्रपति का व्यवहार इसी तरह अनियंत्रित रहा, तो कैबिनेट के लिए भी चुप्पी साधे रखना नामुमकिन हो जाएगा।

महत्वपूर्ण बात:-

खंड‑IV का व्यावहारिक रूप से अब तक एक बार भी पूरी तरह से उपयोग नहीं हुआ। इसकी धमकी या चर्चा ही होती रही है। जैसे डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ 2021 और 2026 में चर्चाएँ।

 

 

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