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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ‘ क्रूर मौन ’

मनीपॉवर, मसल पॉवर या सत्ता के बल पर कोई शक्तिशाली व्यक्ति किसी नागरिक के साथ क्रूरता करे तो मौन तोड़ना, अनिवार्य बन जाता है। समाज में क्रूरता बढ़ रही हो और नागरिक चुप रहें तो, वह भी क्रूर समाज के ‘क्रूर मौन’ नागरिक कहे जायेंगे।
इस देश में वैश्या भी अपने स्वाभिमान पर आ जाये तो, रुपये के बदले अपने शरीर का सौदा नहीं करेगी। इस बार 130 करोड़ लोगों के स्वाभिमान पर चोट लगा है। सरकार की योजनाएं और विकास का लालच स्वाभिमानी नागरिकों के घाव को भरने में सक्षम नहीं है।
यह शब्द किसी व्यक्ति विशेष को अपमानित करने के लिए नहीं कहा जा रहा है। और न हीं केवल प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति जैसे देश के सर्वोच्च पदों पर आसीन महत्वपूर्ण व्यक्तियों के लिए है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अभी लपेटे में हैं। कारण, झूठे वचन। जनभावनाओं व जनअपेक्षाओं की उपेक्षा करना एक राजनेता को शोभा नहीं देता है।
घृणित घटनाएं देखने को मिलेंगी
किसी व्यक्ति ने किसी को चाकू मार दिया। किसी गुण्डे ने सामूहिक हत्या की। किसी ने लड़की का रेप किया, किसी समूह ने जायदाद के लिए नरसंहार किया। किसी मनचले ने बड़ी बेदर्दी से किसी लड़की की हत्या की। ऐसी घटनाएं इस देश में पहले भी होती रही हैं और लोग अपने मन -मस्तिष्क को स्वस्थ नहीं रखेंगे तों , आगे भी ऐसी घृणित घटनाएं देखने को मिलेंगी। ऐसी घटनाओं पर टिका टिप्पणी करना एक प्रधानमंत्री के लिए अनिवार्य नहीं है। लेकिन जो अनिवार्य है यह कि देश की जनभावनाओं का कद्र करना।
2014 के बाद कुछ उपरोक्त घटनाओं से अलग एक विशेष तरीके के अपराध और अपराधियों का दबदबा कायम हुआ। और इस दबदबे का असर 2024 तक रहेगा या आगे भी जारी रहेगा यह भविष्य के गर्भ में है।
सत्ता से मदद और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का मौन
असहिष्णुता, मॉब लिंचिंग, गौरक्षा के नाम पर कु्ररतम हत्याएं, लव जेहाद के नाम पर हत्याएं, मंत्री पुत्र द्वारा किसानों को गाड़ी से कूचलकर मार देना। बीजेपी विधायक कुलदीप सेंगर द्वारा लड़की से बलात्कार करना व उसके परिवार के सदस्यों की हत्या करना। बीजेपी नेता व मंत्री स्वामी चिन्मयानन्द का लड़की के साथ बलात्कार करना। बीजेपी सांसद बृजभूष शरण सिंह पर महिला पहलवानों के साथ बलात्कार करने के आरोप पर सत्ता से मदद और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का मौन इतिहास में दर्ज हो चुका है।
उपरोक्त घटनाएं क्रूरता की श्रेणी में आती हैं। और ऐसे अनगिनत घटनाओं ने जनभावनाओं को आहत किया है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इन असाधारण घटनाओं पर और इनसे जुड़े आरोपियों व अपराधियों पर मौन रहे हैं।
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व्यक्ति के लिए मौन एक ब्रह्मास्त्र
मौन रहना अध्यात्मिक कला है। ध्यान-साधना करने वाले साधकों और चिन्तन करने वाले चिन्तकों के लिए मौन आवश्यक है। बोलते समय शब्दों पर पकड़ मजबूत हो और कार्य व्यहवहार के नजदीक भाषण हो इसलिए, नेता कभी-कभी मौन हो जाते हैं। वाद-विवादों से मुक्त रहने वाले व्यक्ति के लिए मौन एक ब्रह्मास्त्र है।
परन्तु, मनीपॉवर, मसल पॉवर या सत्ता के बल पर कोई शक्तिशाली व्यक्ति किसी नागरिक के साथ क्रूरता करे तो मौन तोड़ना, अनिवार्य बन जाता है। समाज में क्रूरता बढ़ रही हो और नागरिक चुप रहें तो, वह भी क्रूर समाज के ‘क्रूर मौन’ नागरिक कहे जायेंगे।
राजनीतिक दलों के नेताओं ने इनका स्वागत कर, गर्व धारण किया है
बीजेपी सांसद बृजभूष शरण सिंह पर लगे नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण के आरोप जघन्य है। इस घटना से जुड़े किरदार साधारण नहीं हैं। इनकी तुती पूरे विश्व में गुंजती है। बजरंग पुनिया, विनेश फोगाट, साक्षी मलिक, पीटी ऊषा और इनके सम्मान में कसीदे गढ़ने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इन किरदारों में शामिल हैं।
राजनेता के रुप में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी को भी पूरा विश्व जानता है। लेकिन भावनात्मक लगाव में ये खिलाड़ी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से कहीं आगे हैं। इन खिलाड़ियों ने देश के लिए खेला है। न केवल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बल्कि सभी, राजनीतिक दलों के नेताओं ने इनका स्वागत कर, गर्व धारण किया है। देश के नागरिकों ने इनको अपनाया है और इनके सम्मान को हृदय में जगह दी है।
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घृणित घटनाएं देखने को मिलेंगी
किसी व्यक्ति ने किसी को चाकू मार दिया। किसी गुण्डे ने सामूहिक हत्या की। किसी ने लड़की का रेप किया, किसी समूह ने जायदाद के लिए नरसंहार किया। किसी मनचले ने बड़ी बेदर्दी से किसी लड़की की हत्या की। ऐसी घटनाएं इस देश में पहले भी होती रही हैं और लोग अपने मन -मस्तिष्क को स्वस्थ नहीं रखेंगे तों , आगे भी ऐसी घृणित घटनाएं देखने को मिलेंगी। ऐसी घटनाओं पर टिका टिप्पणी करना एक प्रधानमंत्री के लिए अनिवार्य नहीं है। लेकिन जो अनिवार्य है यह कि देश की जनभावनाओं का कद्र करना।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का वचन उसी दिन भंग हो गया
देश के नागरिकों को याद रखना चाहिए कि इन खिलाड़ियों के सम्मान की रक्षा करने का वचन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी दिया था। इतने महत्वपूर्ण व्यक्तियों को दिये हुए वचन का पालन न करना, बलात्कार के आरोपी ब्रजभूषण शरण सिंह का साथ देना ही माना जा रहा है। विगत माह से चल रहे पहलवानों के धरना प्रदर्शन में पूरा देश यह जान चुका है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का चारित्र्यबल कितना है।
बलात्कार के आरोपी ब्रिजभूषण शरण सिंह पर कार्रवाई करने का पहला अधिकार केन्द्र सरकार का था। लेकिन कई दिनों तक खिलाड़ियों के धरना-प्रदर्शन करने के बावजूद केन्द्र सरकार उन्हें न्याय पाने से दूर करती रही। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप करने के बाद दिल्ली पुलिस ने बलात्कार के आरोपी ब्रजभूषण शरण सिंह पर एफआईआर दर्ज किया है। न कि केन्द्र सरकार के कहने पर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का वचन उसी दिन भंग हो गया था।
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नाबालिग लड़की से बलात्कार करने के अपराध में आरोपी ब्रिजभूषण शरण सिंह पर पॉक्सो एक्ट भी लगा है। इसके बावजूद अभी तक आरोपी सांसद ब्रिजभूषण शरण सिंह को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार नहीं किया है। पहलवानों ने जंतर-मंतर स्थित धरना स्थल पर दिल्ली पुलिस द्वारा उनके साथ मारपीट करने, फब्तियां कसने, डराने-धमकाने का आरोप लगाया है। इतना ही नहीं दिल्ली पुलिस ने विश्व विख्यात खिलाड़ियों को असंवैधानिक तरीके से धरना स्थल से हटाकर उन्हें अपमानित कर थानों में बैठा दिया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रसिद्धि का विशेष चुनावी हथियार
द्रष्टा का मानना है कि देश का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रधानमंत्री पद पर बैठे व्यक्ति से जनता की कितनी अपेक्षाएं होती है। इसका इल्म तो, पदासीन व्यक्ति को अवश्य होना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘मन की बात’ करके जनभावनाओं को और बल दिया है। ‘मन की बात’ कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रसिद्धि का विशेष चुनावी हथियार भी है। लेकिन कभी भी उपरोक्त घटनाओं को रोकने के लिए मन की बात नहीं की। ऐसी क्रूर घटनाओं पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का मौन, क्रूरता के श्रेणी में आता है।
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देश का स्वाभिमानी नागरिक कभी बर्दाश्त नहीं करेगा।
इस देश में वैश्या भी अपने स्वाभिमान पर आ जाये तो, रुपये के बदले अपने शरीर का सौदा नहीं करेगी। इस बार 130 करोड़ लोगों के स्वाभिमान पर चोट लगा है। सरकार की योजनाएं और विकास का लालच स्वाभिमानी नागेिरकों के घाव को भरने में सक्षम नहीं है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी चाहे जितने भी विकास के डिंगे हांक लें या कंकड़ पत्थर जोड़कर निर्माणकार्यों को विकास का नाम दे दें। लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ‘क्रूर मौन’ जनभावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रहा है। जिसे देश का स्वाभिमानी नागरिक कभी बर्दाश्त नहीं करेगा।
……….(व्याकरण की त्रुटि के लिए द्रष्टा क्षमाप्रार्थी है )
रविकांत सिंह
(संपादक -द्रष्टा )
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