
हाँ, ‘हम रिजीम चेंज’ यानी सत्ता परिवर्तन चाहते हैं वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण के इस कथन ने भारतीय जानता पार्टी के नेताओं को बेचैन कर दिया है। बीजेपी नेताओं से भी आगे बढ़कर न्यूज़ चैनेलों के बदनाम एंकर सत्ता के बचाव में उतर गए हैं। न्यूज़ एंकरों ने बीजेपी नेताओं के साथ राग में राग मिलाते हुए प्रदर्शनकारियों को देशद्रोही बताने में जुट गए हैं ।
भारत में क्यों हो रही है ‘रिजीम चेंज’ की बात ? इस प्रश्न का उत्तर जानने कि बजाय पत्रकारिता को बदनाम करने वाले चरित्रहीन न्यूज़ एंकर इस लोकतांत्रिक मांग को असंवैधानिक बता रहे हैं।
किसी भी लोकतांत्रिक देश में सत्ता परिवर्तन की बात करना नागरिकों का सबसे महत्वपूर्ण अधिकार है। भारत में यह अधिकार नागरिकों ने अपने मानवीय यातनाओं के खिलाफ एक निरंतर संघर्षों से हासिल किया है। ब्रिटिश राज और राजशाही से मुक्त होकर आजाद भारत में नागरिकों ने अपना संविधान बनाया।
भारतीय नागरिकों के दृढ संकल्पों को कथन के रूप में महत्त्व देते हुए संविधान की प्रस्तावना में स्पष्ट है कि:-
हम भारत के लोग, भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों को:सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त कराने के लिए, तथा उन सबमें व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ़संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवंबर 1949 ई. को एतद्द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।
संविधान की इसी प्रस्तावना के अनुसार अपने धर्म, विचारों और जीविका के साधनों को तलासने वाला कर्तव्यनिष्ठ व्यक्ति देश का नागरिक और भारत का भाग्य विधाता माना जाता है।
अब प्रश्न उठता है कि इतना स्पष्ट संविधान की प्रस्तावना और नागरिक अधिकारों के अनुच्छेद होने के बावजूद भारत के अधिकतर नागरिक आर्थिक सामाजिक और राजनीतिक समस्याओं के जनक क्यों बन रहे हैं ?
द्रष्टा ऐसे प्रश्नों पर नागरिकों को ध्यान देने कि बात करता रहा है। मानव की सभी समस्याओं और दुखों का मूल अविद्या है।
“अविद्या क्षेत्रमुत्तरेषां प्रसुप्ततनुविच्छिन्नोदाराणाम्”
सरल अर्थों में अविद्या ही अहंकार, मोह , नफ़रत और मृत्यु के भय को उत्पन्न करता है, चाहे दुःख छिपा हुआ हो या कमजोर हो, बीच-बीच में दबने वाले या प्रकट अवस्था में हों।
उपनिषदों के अनुसार, जो मनुष्य यह नहीं जानता कि वह वास्तविक आत्म-स्वरूप (ब्रह्म) है और संसार को ही सत्य मान बैठा है यही अविद्या है। तब तक वह जन्म-मृत्यु और तमाम मानसिक-शारीरिक दुखों से घिरा रहता है।
न्यायालय और पुलिस के जरिये लोकतंत्र पर कब्ज़ा
भारत में भी 2014 के बाद से सत्ताधीशों का अहंकार और नागरिकों के बीच नफ़रत हिंसा चरम पर पहुँच चूका है। दुनिया भर के विद्वान् भारतीय दर्शन व नीतियों को पढ़ते हैं और महत्त्व देते हैं । परन्तु भारत के नागरिक अपने निजी झमेलों में पड़कर नैतिक नियमों को अपनाना तो दूर की बात इसे पढ़ते तक नहीं हैं । ऐसे लोगों की संख्या 98 प्रतिशत से अधिक है। और यही लोग अपनी समस्यायों के स्वयं जनक हैं। भारतीय समाज की प्रगति को रोकने और विनाश के लिए 98 प्रतिशत नागरिकों का आंकड़ा अविद्या के प्रभाव में होना पर्याप्त है।
यह बात बीजेपी और संघ का शीर्ष नेतृत्व अच्छी तरह जानता है।और हिंदुत्व के नाम पर आबादी का ध्रुवीकरण कर बीजेपी और संघ एक बड़ी आबादी को अपने पक्ष में ले लिया है। इस प्रकार मीडिया, चुनाव आयोग, न्यायालय और पुलिस के जरिये लोकतंत्र पर कब्ज़ा जमा लिया है । गृह मंत्री अमित शाह अपने इसी तंत्र और अविद्या के प्रभाव में आये नागरिकों के सहारे 30 साल तक सत्ता में अजेय बने रहने का काल्पनिक दम्भ भर रहे हैं।
नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा अनैतिक और भ्रष्ट आचरण का सबसे कुख्यात उदाहरण चयन समिति द्वारा चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के खिलाफ नरेंद्र मोदी ने अपनी सत्ता को बनाये रखने के लिए प्रपंचों के सहारे चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए चयन समिति बनाया।
अधिनियम अनुच्छेद 324(2) के तहत संसद को दी गई शक्ति का उपयोग करके चयन समिति बनाया गया। चयन समिति में प्रधानमंत्री (अध्यक्ष), लोकसभा में विपक्ष के नेता (या सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता) और प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री को रखा। जबकि चयन समिति में मुख्य न्यायाधीश को रखना नीतिपूर्ण था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भारी दबाव
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने फरवरी 2026 और उसके बाद विभिन्न मंचों, सोशल मीडिया तथा जनसभाओं में यह गंभीर राजनीतिक आरोप लगाया था कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के पास ‘एपस्टीन फाइल्स’ और अडानी से जुड़े मामलों के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भारी दबाव है।
डोनाल्ड ट्रम्प ने 15 अक्टूबर 2025 को व्हाइट हाउस की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि मैं उनका पॉलिटिकल करियर बर्बाद नहीं करना चाहता”। नरेंद्र मोदी ने आज तक डोनाल्ड ट्रम्प के बयानों का खंडन नहीं किया है। नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में भारत की गरिमा पर अमेरिका ने कई बार कड़ा प्रहार किया है। ऑपरेशन सिन्दूर के दौरान ट्रम्प के कहने पर भारत ने पकिस्तान से सीजफायर किया।
-5 फरवरी 2025 की है, जब डोनाल्ड ट्रम्प सरकार की अवैध प्रवासन-रोकी नीति के तहत अमेरिका ने 104 भारतीय नागरिकों को एक अमेरिकी सैन्य विमान C-17 Globemaster III से अमृतसर भेजा। कई पुरुष प्रवासियों ने बताया कि उन्हें लगभग 40 घंटे की उड़ान में हाथ में हथकड़ी और पैरों में बेड़ी लगाई गई थी।
-भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, जनवरी 2025 से जुलाई 2026 के बीच लगभग 4,800 भारतीयों को अमेरिका से भारत प्रत्यर्पित किया गया।
– दूसरी तरफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने मार्च 2026 में अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को आतंक की ट्रैनिंग देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
-NIA का आरोप था कि ये सभी टूरिस्ट वीजा पर भारत आए और बिना वैध परमिट के मिजोरम के जरिए म्यांमार जाकर वहां के उग्रवादी/जातीय समूहों को ड्रोन संचालन और युद्ध रणनीति का प्रशिक्षण दे रहे थे।
-लेकिन सितंबर 2026 में जमानत पर रिहा कर दिया गया और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी सरकार और विदेश मंत्रालय के बढ़ते कूटनीतिक दबाव के बाद उग्रवादी/जातीय समूहों को आतंक कि ट्रेनिंग देने वाले इन आतंकियों को मानवीय आधार पर और परिवार से मिलने के लिए अपने देश लौटने की अनुमति दी गई।
अमेरिका द्वारा 104 प्रवासी भारतीय नागरिकों को अवैध बताकर हथकड़ी बेड़ी में बाँधकर भारत में छोड़ने, भारत द्वारा पकड़े गए अमेरिकी आतंकियों को डोनाल्ड ट्रम्प के दबाव में बाइज़्ज़त मानवीय आधार पर अमेरिका वापस लौटाना। और आयात टैरिफ बढ़ाने व ट्रेड डील में
कृषि उत्पादों को खरीदने को लेकर भारत पर दबाव देने तक नरेंद्र मोदी का मौन हो जाना, राहुल गाँधी और डोनाल्ड ट्रम्प की बात को सत्य साबित करते हैं। डोनाल्ड ट्रम्प नरेंद्र मोदी का गला पकड़ रखे हैं।
इसीलिए, कॉकरोच जनता पार्टी, वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण, छात्र नेता नेहा बोरा, चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के साथ सत्ता परिवर्तन( रिजीम चेंज ) की बात कह रहे हैं ताकि भारत और भारतीयता कि रक्षा की जा सके।
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