अपराध के आरोपी सांसदों की मुठ्ठी में हमारी सांसे

2024  की 18वीं लोकसभा में 543 सदस्यों में से  46% यानी 251 सांसदों पर अपराध के आरोप हैं।  इनमें 170 (31%) सांसदों पर हत्या, बलात्कार, अपहरण और महिलाओं के खिलाफ  गंभीर अपराध के आरोप हैं। केंद्र सरकार के वर्तमान मंत्रिमंडल (केंद्रीय मंत्रिपरिषद) में कुल 72 मंत्रियों में से 29 (40%) के खिलाफ अपराध के मामले दर्ज हैं।

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रविकांत सिंह ‘द्रष्टा’

प्रकृति पुरुष बनाम राक्षसी प्रवृत्ति : 3

एक पेड़ मां के नाम कर करोड़ों पेड़ काटने की बदनीयत

एक पेड़ मां के नाम कर करोड़ों पेड़ काटने की बदनीयत केवल शैतानी खोपड़ी के धनि व्यक्तियों में ही हो सकती है। जिन वस्तुओं का निर्माण ब्रह्मांडीय घटना से हुआ है वैसा निर्माण इंसान नहीं कर सकता है। प्रकृति ने लाखों करोड़ों वर्षों में पृथ्वी को जीवों के रहने योग्य बनाया है। धरती और उसके जन जीवन का विकास करोड़ों वर्षों की सतत प्रक्रिया का परिणाम है।

आदिमानव से आज हम एक सभ्य मानव बन गए हैं। हम मानव रोबोट बना सकते हैं, प्राण वायु के लिए यंत्र बना रहे हैं, सूरज की तरह यंत्र बना रहे हैं परन्तु सत्य यह है कि हम आज भी ब्रह्माण्ड में पृथ्वी जैसा दूसरा घर खोज रहे हैं? विकल्प कभी भी प्रकृति की वास्तविक रचना नहीं हो सकता।

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भारतीय राजनेता धन के मद में अपना मानसिक संतुलन खो बैठे हैं। पगलाए सत्ताधीशों ने राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास के नाम पर मानव के विनाश का रास्ता चुन लिया है। उनके निर्णय ने देश के आम नागरिकों का जीवन खतरे में डाल दिया है। उत्तर भारत की सुरक्षा कवच कही जाने वाली अरावली पर्वत श्रृंखला का जीवन उन्होंने ख़त्म करने की ठान ली है। अरावली पर्वत श्रृंखला भारत की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है। अरावली पर्वत श्रृंखला गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली-NCR तक फैली हुई है।

अरावली की परिभाषा

अरावली में लगभग 300 से अधिक प्रकार की वनस्पतियां, 120 से अधिक पक्षी प्रजातियां, और विभिन्न स्तनधारी जैसे तेंदुआ, हाइना, नीलगाय, सांभर, लोमड़ी आदि पाए जाते हैं। यह क्षेत्र रेगिस्तान के फैलाव को रोकने वाला एक प्राकृतिक अवरोधक है। केंद्र सरकार ने कहा कि आसपास की ज़मीन से कम से कम 100 मीटर (328 फीट) ऊँचे ज़मीन के हिस्से को ही अरावली पहाड़ी माना जाएगा। दो या उससे ज़्यादा ऐसी पहाड़ियाँ, जो 500 मीटर के दायरे के अंदर हों और उनके बीच ज़मीन भी मौजूद हो, तब उन्हें अरावली शृंखला का हिस्सा माना जाएगा।अरावली की इस परिभाषा को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।

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AQI 500 पार होने के बावजूद असंवैधानिक क़ानून

2025  में यह आंकड़ा काफी बढ़ने वाला बताया जा रहा है। एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 500 पार होने के बावजूद  सरकार FRA 2023 जैसे असंवैधानिक क़ानून बना रही है और सुप्रीम कोर्ट मान्यता दे रहा है। अरावली पर्वत श्रृंखला भूजल रिचार्ज करता है। और दिल्ली-NCR के लिए “हरे फेफड़े” के रूप में कार्य करता है, जो वायु गुणवत्ता सुधारता है।

आज दिल्ली एनसीआर की हवा की गुणवत्ता बेहद ख़राब हो चुकी है। स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर (SoGA) 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में वायु प्रदूषण से पूरी दुनिया में 79 मौतें हुईं हैं।  Clean Air Fund की रिपोर्ट के अनुसार केवल भारत में प्रदूषित हवा के कारण सालाना 21 लाख व्यक्तियों की मौत होती है। इन 21 लाख व्यक्तियों की मौत में फेफड़ों की पुरानी बीमारियां (COPD), हृदय रोग, स्ट्रोक, डायबिटीज, डिमेंशिया और फेफड़ों का कैंसर शामिल हैं।

भारत का लगभग ८५ प्रतिशत भूजल प्रदूषित

आज पूरी दुनिया पेय जल संकट का सामना कर रही हैं। भारत में पेयजल प्रदूषण एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य संकट बन चुका है। तेजी से बढ़ती जनसंख्या, कृषि की मांग, औद्योगीकरण और जलवायु परिवर्तन के कारण भूजल स्तर में गिरावट और पेयजल प्रदूषण एक गंभीर समस्या बन चुकी है। भारत का लगभग ८५ प्रतिशत भूजल प्रदूषित हो चूका है।

देश के सभी राज्यों के भूजल में लीड, कैडमियम, क्रोमियम ,नाइट्रेट्स, यूरेनियम,  आर्सेनिक और फ्लोराइड ने जल का संतुलन बिगड़ दिया है। CGWB की 2024 रिपोर्ट में 440 जिलों के 20% से अधिक सैंपल्स प्रदूषित पाए गए, जो 600 मिलियन (60  करोड़ )से अधिक लोगों को प्रभावित कर रहा है।  प्रदूषित जल पीने के कारण प्रतिदिन 500 बच्चे डायरिया से मर जाते हैं।  पेयजल में पैथोजेनिक माइक्रोब्स जैसे जैविक प्रदूषक व्यक्ति के शरीर में कालरा, डिसेंट्री और हेपेटाइटिस जैसी बीमारियां फैलाते हैं। इन जलजनित रोगों से लड़ने के लिए सरकार पर सालाना  600 मिलियन डॉलर का बोझ पड़ता है।

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2025 में भारत का भूजल स्तर और पेयजल प्रदूषण एक आपातकालीन स्थिति है, जो करोड़ों जीवन को प्रभावित कर रहा है। निकासी सीमा और प्रदूषण नियंत्रित करने की बजाय सरकारें अंधांधुंध खनन, जंगलों, नदियों को उजाड़ने में लगी है।  जैव विविधता यहां की पारिस्थितिकी को संतुलित रखती है, लेकिन खनन जैसी गतिविधियां इसे बाधित कर रही हैं। अगर सरकार और आप जैसे नागरिक सचेत नहीं हुए तो जल्द ही कई राज्यों में भूजल स्तर इतना निचे आ जायेगा कि यही सरकार  ‘डे जीरो’ (जल समाप्ती ) कि घोषणा कर पेयजल निकासी पर प्रतिबन्ध लगा देगी।

अपराध के आरोपी सांसदों का निर्णय

2024  की 18वीं लोकसभा में 543 सदस्यों में से  46% यानी 251 सांसदों पर अपराध के आरोप हैं।  इनमें 170 (31%) सांसदों पर हत्या, बलात्कार, अपहरण और महिलाओं के खिलाफ  गंभीर अपराध के आरोप हैं। यह संख्या 2019 की 17वीं लोकसभा के 43% (233 सांसद) से बढ़ी है, जो 15 वर्षों में 55% की वृद्धि दर्शाती है।

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केंद्र सरकार के वर्तमान मंत्रिमंडल (केंद्रीय मंत्रिपरिषद) में कुल 72 मंत्रियों में से 29 (40%) के खिलाफ अपराध के मामले दर्ज हैं। इनमें से 19 मंत्रियों पर हत्या का प्रयास, महिलाओं के खिलाफ अपराध और हेट स्पीच जैसे गंभीर अपराध के आरोप हैं। हमारे देश के सभ्य नागरिक  इन प्रश्नों पर जरा विचार करें कि –

-क्या संसद में बैठे 46 प्रतिशत अपराध के आरोपी सांसद और मंत्री सभ्य नागरिकों और पर्यावरण को ध्यान में रखकर लोक कल्याणकारी योजनाएं या क़ानून बनाएंगे?

-इन अपराध के आरोपियों की योजनाएं बगैर साज़िस की होंगी यह कौन तय करेगा ?

हत्या बलात्कार अपहरण जैसे जघन्य पाप करने वाले इन आरोपी सांसदों को अपना मत देकर संसद में भेजने वाले  क्या वे अपराधी नहीं हैं ?

-क्या कोर्ट अवैध खनन रोकने या नियंत्रित करने में सफल हुआ है ?

-क्या केंद्र और राज्य सरकारों के नियम -कानूनों ने अवैध खनन पर लगाम लगाया है ?

-प्रदुषण को रोकने और पर्यावरण को संरक्षित करने वाले नियम -कानूनों का सरकारी विभागों ने पालन किया है ?

-बगैर यह विचारे सुप्रीम कोर्ट के जजों ने कैसे असंवैधानिक FRA 2023 को मंजूरी दे दी ?

पर्यावरणविदों कि मान्यता

100 मीटर (328 फीट) ऊँचे ज़मीन के हिस्से को ही अरावली पहाड़ी माना जाएगा। ऐसी परिभाषा गढ़ने वाले दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात के वन विभाग के सचिव, फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया, सेंट्रल एम्पावर्ड कमिटी और जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के प्रतिनिधि हैं।

ऐसी परिभाषा को स्वीकार करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अरावली को रेगिस्तान फैलाव के खिलाफ बाधा, भूजल रिचार्ज क्षेत्र और जैव विविधता आवास के रूप में महत्वपूर्ण बताया, और अनियंत्रित खनन को “राष्ट्र की पारिस्थितिकी के लिए बड़ा खतरा” करार दिया है। पर्यावरणविदों का मानना है कि वर्तमान परिभाषा से खतरा बढ़ सकता है।

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इन बातों से स्पष्ट है कि सत्ता और कारपोरेट का गठबंधन सब कुछ बताकर हमें मार रहा है। आवश्यकता है यह जानने की कि जल, जंगल, जमीन, स्वच्छ हवा जो न केवल मानव बल्कि धरती के प्रत्येक जीवों का प्राण है उसे कौन मुठ्ठी में कर रहा है।हम इनसे कैसे लड़ेंगे और जल, जंगल, जमीन को इनके कब्जे से कैसे बाहर निकालेंगे ?

द्रष्टा का मानना है कि आप जाति और नकली धर्म से बाहर निकल कर मानव में निष्ठा रखते हुए अपने स्वाभिमान को जगायेंगे तब आप सभी सत्ता और कारपोरेट के विनाशकारी गठबंधन को तोड़ सकते है। और अपनी समस्याओं से बाहर निकल सकते हैं।

 

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