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किसान नेता दल्लेवाल के समर्थन में राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन
दल्लेवाल की प्राण रक्षा के लिए पीएम मोदी को संबोधित पत्र पर हस्ताक्षर करने की अपील
नई दिल्ली (द्रष्टा ब्यूरो)। वरिष्ठ किसान नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल की प्राण रक्षा के लिए राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन की ओर से एक नायाब पहल की गई है। आंदोलन से जुड़े बसवराज पाटिल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखित पत्र की पिटिशन को ऑनलाइन साइन करने का अनुरोध किया है। उन्होंने पिटिशन का एक लिंक भी शेयर किया है।
लिंक-किसान नेता दल्लेवाल जी की जीवन रक्षा के लिए प्रधानमंत्री जी को पत्र
श्री पाटिल ने लोगों के समक्ष अपनी बात रखी है। उनका कहना है कि वरिष्ठ किसान नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल न्यूनतम समर्थन मूल्य गारंटी कानून बनाने की मांग के समर्थन में आमरण अनशन पर बैठे हैं। उनके अनशन के 50 दिन पूरे हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार उनकी अवस्था नाजुक होती जा रही है। श्री पाटिल ने नागरिकों से अपील में कहा है कि देश के वरिष्ठ विचारशील एवं संवेदनशील जनों में आप शामिल हैं। आप भी श्री दल्लेवाल जी के आरोग्य की नाजुक दशा से चिंतित होंगे।
राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन ने अपनी राष्ट्रीय कार्यसमिति में न्यूनतम समर्थन मूल्य गारंटी कानून बनाने की मांग का प्रस्ताव 2021 में पारित किया था। संयोग से उसके बाद इस मांग के समर्थन में किसान संगठनों ने आंदोलन प्रारंभ किया था। हमारा संगठन न्यूनतम समर्थन मूल्य गारंटी कानून बनाने की मांग के प्रति प्रतिबद्ध है।
न्यूनतम समर्थन मूल्य गारंटी कानून की मांग नई नहीं है। केंद्र सरकार द्वारा गठित एमएस स्वामीनाथन समिति ने भी उसे बनाने के लिए केंद्र सरकार को सुझाव दिया था। कभी व्यक्तिगत रूप से माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने और उनके राजनीतिक दल ने भी उसका प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष समर्थन किया था। अभी केंद्र सरकार 23 कृषि जींसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करती है। कुछ ही राज्यों में उस मूल्य पर चार पांच कृषि जींसों की खरीद की व्यवस्था है।
विशेषज्ञों के अनुसार जिसका लाभ देश के केवल 6% किसानों को हो रहा है। कृषि विशेषज्ञों ने गणना करके घोषित किया है कि सभी किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद का लाभ न मिलने के कारण केवल सन 2000 से 2016 के बीच किसानों को 45 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था। अर्थात अधिकांश किसानों के कृषि जींसों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर न होने के कारण किसानों के घर सन 2000 से 20216 तक 45 लाख करोड़ रुपए कम पहुंचे थे।
उपरोक्त सब बातों के कारण देश के सामान्य किसानों की दशा समय के साथ दयनीय होते जा रही है। अगर केंद्र सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य गारंटी कानून बनाती है तो गांवों और किसानों की आर्थिक दशा में तीव्रता से सुधार आएगा, जिसका असर पूरी अर्थव्यवस्था पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और देश के विकास को गति मिलेगी। कुछ लोग आशंका व्यक्त करते हैं कि सभी कृषि जींसों को खरीदने का भार केंद्र सरकार पर जाएगा और वह उस खर्च के कारण दिवालिया हो जाएगी। पर उनका यह दुष्प्रचार निराधार है। केंद्र सरकार ने गन्ना खरीद के लिए अन्य प्रकार से गारंटी कानून बनाया है। सरकारों की चीनी कारखाने और निजी चीनी कारखाने उसी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदते हैं, कभी भी केवल सरकार को पूरा का पूरा खरीदने की नौबत नहीं आयी है।
वैसे ही न्यूनतम समर्थन मूल्य गारंटी कानून बनाने के साथ केंद्र सरकार ऐसी व्यवस्था बना सकती है, जिससे केंद्र या राज्य सरकारों पर कोई अतिरिक्त बोझ न आए। जैसे अगर हर जिले में ऐसी फॉर्मर्स प्रोड्यूसर्स कंपनियों को बनाने में सहयोग किया जाए, जो किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कृषि जींसों को खरीदे और केंद्र सरकार एक एक किसान से खरीदने पर उसकी गोडाउन रिसिप्ट पर उस फॉर्मर्स प्रोड्यूसर्स कंपनी को तुरंत बैंक से ऋण की व्यवस्था का प्रावधान कर दे। ऐसी व्यवस्था करने से अधिकांश किसान केंद्र और राज्य सरकारों के पास कृषि जींसों को बेचने पहुंचेंगे ही नहीं और केंद्र सरकार को फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के भारी आर्थिक घाटे से भी राहत मिले। ऐसी अनेक प्रकार की व्यवस्था बनाकर केंद्र सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य गारंटी कानून से संभावित आर्थिक बोझ से बच सकती है।
वैसे भी अगर गन्ने के समान सरकार और निजी व्यापारी एक ही न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किसानों से कृषि जींसों को खरीदने लगेंगे तो सरकारी तंत्र से त्रस्त अधिकांश किसान, निजी व्यापारियों को ही बेचने जाएंगे। इस विषय में अगर आवश्यक हो तो हम न्यूनतम समर्थन मूल्य गारंटी कानून के विषय में केंद्र सरकार से परिचर्चा करने के लिए भी तैयार हैं।
हमारे समान आप भी किसानों की जायज मांग के समर्थन में हैं और किसान नेता श्री जगजीत सिंह दल्लेवाल जी की प्राण रक्षा के लिए भी चिंतित हैं। न्यूनतम समर्थन मूल्य गारंटी कानून बनाने और किसान नेता श्री जगजीत सिंह दल्लेवाल जी की प्राण रक्षा के लिए प्रधानमंत्री के नाम एक साझा पत्र देश के सामाजिक,राजनीतिक, धार्मिक आदि वरिष्ठ नेताओं द्वारा भेजने पर विचार किया है। दल्लेवाल जी की नाजुक दशा के कारण आप जैसे वरिष्ठ लोगों द्वारा हस्ताक्षर किया गया ऐस पत्र शीघ्र माननीय प्रधानमंत्री जी तक पहुंचना अत्यावश्यक हो गया है।
लिंक में उपलब्ध पत्र पर हस्ताक्षर करके हमें स्पीड पोस्ट या कुरियर से तथा स्कैन करके ईमेल से भेजने का आपसे अनुरोध है। ऐसे सभी पत्रों को एकत्र करके और उसकी सूची के साथ हम प्रधानमंत्री कार्यालय भेज देंगे। किसान और हम आपके सदैव ऋणी रहेंगे। इस प्रकार श्री पाटिल को जन समर्थन मिला तो यह किसान आंदोलन के लिए संजीवनी का काम करेगा। दल्लेवाल के लिए भी। उम्मीद की जानी चाहिए कि हस्ताक्षर अभियान में लोग आगे आएंगे और किसान आंदोलन के प्रति अपनी संवेदनशीलता का परिचय देंगे।
बहरहाल, 2020 में किसान आंदोलन के दौरान सरकार के दमनकारी करवाई पर नागरिकों कि चुप्पी कृषि को चौपट कर रही है। कई किसान आंदोलन में अपनी जान गंवा चुके है। किसानों की आत्महया रुक नहीं रही है। उनकी आर्थिक हालत दिन पर दिन ख़राब होती जा रही है। खेती किसानी के प्रति देश के शहरी नागरिकों का रवैया उदासीन है। अब देखना है कि राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन के इस पहल और समर्थन से दल्लेवाल और किसानों को नागरिकों का कितना समर्थन हासिल होता है।