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पश्चिम बंगाल त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में कत्लेआम, चुनाव आयोग लाचार
-बंगाल पंचायत चुनाव हिंसा में अब तक 15 की मौत, मुर्शिदाबाद में बम फटने से CISF जवान घायल
कोलकाता(एजेंसी)। गांवों की अपनी सरकार पंचायतीराज का विध्वंश पश्चिम बंगाल के आज त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में देखने को मिल रहा है। चुनाव आयोग की लचर व्यवस्था ने ली कईयों की जान। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए शनिवार को मतदान शुरू हुआ तो, हिंसा की खबरें भी मिलने लगीं। चुनाव में हिंसा की आशंका के बीच भारी सुरक्षाबलों की तैनाती की गई थी। इसके बावजूद बड़े पैमाने पर खून -खराबे में अब तक 15 से ज्यादा लोगों की मौत की खबर है। वहीं, कूचबिहार में एक पोलिंग बूथ में तोड़फोड़ और बैलेट पेपरों को आग लगाने की घटना भी सामने आई। इस हिंसा के बीच राज्य में 73 प्रतिशत मतदान हुआ है।
TMC पर धांधली का आरोप लग रहा है। वहीं TMC बीजेपी, कांग्रेस और CPM पर हिंसा और हत्याओं का आरोप लगा रही है। कहीं चुनाव बहिष्कार हुआ है तो कहीं कई लोगों को बिना वोट डाले वापस कर दिया गया है। निर्दलीय उम्मीदवार के एक एजेंट की हत्या हुई है। डायमंड हर्बर, मुर्शीदाबाद और नादिया में बम चलाए गए हैं। पूरे बंगाल में पंचायत चुनाव के बीच हिंसा जारी है। कई जगह क्रूड बम फेंके गए हैं। जलपाईगुड़ी पर TMC कार्यकर्ता पर हमला हुआ है। बताया जा रहा है कि कई जगह शिकायतें आ रही हैं कि बूथ पर पहुंचने से पहले ही लोगों के वोट डाल दिए गए हैं। BJP ने रात में ही लोगों के नाम पर फर्जी वोट देने के आरोप TMC पर लगाए हैं।
मुर्शिदाबाद हमेशा हिंसा का केंद्र
मुर्शिदाबाद जिले में, जो पंचायत चुनावों के दौरान हमेशा हिंसा का केंद्र रहा है। पंचायत चुनाव से पहले मुर्शिदाबाद जिले के शमशेरगंज इलाके में शुक्रवार रात तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई। दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के बीच मारपीट होने से एक घर में तोड़फोड़ की गई। घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस स्टेशन की एक टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। शनिवार को मतदान के पहले कुछ मिनटों के भीतर फिर से बड़े पैमाने पर हिंसा देखी गई। तोड़फोड़ की गई। यहां मतपत्र जला दिए गए। बमबारी की गई। पुरुलिया में भी हिंसा हुई है। रानीनगर में सीपीएम और तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच झड़प के बाद कम से कम 24 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। मुर्शिदाबाद के रेजीनगर पुलिस स्टेशन के अंतर्गत बेलडांगा 2 ब्लॉक में स्थानीय तृणमूल कांग्रेस नेता यासीन शेख की कथित तौर पर गोली मारकर हत्या कर दी गई। मुर्शिदाबाद के डोमकल में कांग्रेस कार्यकर्ता शाहबुद्दीन शेख की हत्या की भी खबरें सामने आई हैं।
कूच बिहार में हत्या
कूच बिहार जिले से भी हिंसा की सूचना मिली, जहां सीताई ब्लॉक के बाराविटा प्राथमिक विद्यालय में एक मतदान केंद्र में तोड़फोड़ की गई। सुबह लगभग 7.30 बजे मतदान शुरू होने के कुछ ही मिनट बाद मतपेटियां तोड़ दी गईं और बैलेट पेपर नष्ट कर दिए गए। कथित तौर पर कूचबिहार के फलितबाड़ी में बीजेपी के पोलिंग एजेंट माधव विश्वास की गोली मारकर हत्या कर दी गई है।
CRPF के जवान नदारत
दक्षिण 24 परगना का भांगर, जहां नामांकन प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर हिंसा और तीन मौतें हुई थीं। वहां भी सुबह तृणमूल कांग्रेस और ऑल इंडिया सेक्युलर फ्रंट (एआईएसएफ) कार्यकर्ताओं के बीच झड़प और गोलीबारी के बाद तनाव हो गया। कथित तौर पर गोली लगने से घायल हुए दो एआईएसएफ कार्यकर्ताओं को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और फिलहाल उनकी हालत गंभीर है।
मालदा जिले में कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच झड़प की भी खबर है। राज्य में 8 जून को मतदान की तारीखों की घोषणा के बाद से चुनाव संबंधी हिंसा में कुल 22 लोग मारे गए हैं। पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव के दौरान केंद्रीय सुरक्षा बल तैनात किए जाने का दावा किया गया था लेकिन कई जगह पर CRPF के जवान नदारत हैं। पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव से पहले पिछले कुछ दिनों में मुर्शिदाबाद, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, उत्तर दिनाजपुर, मालदा और कूचबिहार जैसे जिलों में हिंसा की कई घटनाओं सामने आई। ऐसे में राज्य में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए मतदान चुनौतिपूर्ण था। इन चुनावों के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया था और यहां तक कि उन्हें परिणाम घोषित होने के बाद दस दिनों तक रुकने का आदेश भी दिया गया है, ताकि चुनाव के बाद किसी भी तरह की हिंसा को रोका जा सके।
पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव से पहले पिछले कुछ दिनों में मुर्शिदाबाद, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, उत्तर दिनाजपुर, मालदा और कूचबिहार जैसे जिलों में हिंसा की कई घटनाओं सामने आई। ऐसे में राज्य में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए मतदान चुनौतिपूर्ण था। इन चुनावों के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया था और यहां तक कि उन्हें परिणाम घोषित होने के बाद दस दिनों तक रुकने का आदेश भी दिया गया है, ताकि चुनाव के बाद किसी भी तरह की हिंसा को रोका जा सके।
बंगाल में चुनावों के दौरान हिंसा का इतिहास रहा है, जो कम्युनिस्ट शासन के दौरान बड़े पैमाने पर थी और आज तक जारी है। राज्य सरकार का दावा है कि वह हिंसा की घटनाओं की संख्या को कम करने में सक्षम है और मीडिया झूठी कहानी पेश करने के लिए छिटपुट घटनाओं का उपयोग कर रहा है। इससे पहले हिंसा को रोकने के लिए कथित तौर पर पर्याप्त कदम नहीं उठाने के लिए राज्यपाल की आलोचना झेल रहे राज्य चुनाव आयोग ने इन चुनावों के लिए केंद्रीय बलों की 800 से अधिक कंपनियों की मांग की थी।
पंचायत चुनाव के लिए राज्य में जनसभाएं, रोडशो और घर-घर जाकर प्रचार किया गया। इसमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी समेत अनेक नेताओं ने भाग लिया।
हिंसा का इतिहास
बंगाल में चुनावों के दौरान हिंसा का इतिहास रहा है, जो कम्युनिस्ट शासन के दौरान बड़े पैमाने पर थी और आज तक जारी है। राज्य सरकार का दावा है कि वह हिंसा की घटनाओं की संख्या को कम करने में सक्षम है और मीडिया झूठी कहानी पेश करने के लिए छिटपुट घटनाओं का उपयोग कर रहा है। इससे पहले हिंसा को रोकने के लिए कथित तौर पर पर्याप्त कदम नहीं उठाने के लिए राज्यपाल की आलोचना झेल रहे राज्य चुनाव आयोग ने इन चुनावों के लिए केंद्रीय बलों की 800 से अधिक कंपनियों की मांग की थी।
राज्य चुनाव आयोग के मुताबिक, 22 जिलों की 63,229 ग्राम पंचायत सीटों, पंचायत समिति की 9,730 सीटों और जिला परिषद की 928 सीटों पर चुनाव प्रत्याशियों की किस्मत दांव पर लगी है। चुनाव के नतीजे 11 जुलाई को आएंगे। पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव के दौरान पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस ने भी मतदान केंद्रों का दौरा किया और मतदाताओं एवं उम्मीदवारों से बातचीत की।