IndiGo Crisis : भारत सरकार को इंडिगो की खुली चुनौती

एयरलाइन इंडिगो की इस धोखे के कारण हजारों यात्री फंस गए ,उदाहरणस्वरूप, एक महिला अपने पति का शव कोलकाता ले जाने में असमर्थ रही। एयरपोर्ट पर रातें काटनी पड़ीं, शादियां और परीक्षाएं प्रभावित हुईं। नवंबर में ऑन-टाइम परफॉर्मेंस 84% से गिरकर 68% हो गई।

DrashtaNews

नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो ने भारत सरकार को खुली चुनौती दी है। सरकार के नियम और कानूनों की धज्जियां उड़ाते हुए यात्रियों को भारी संकट में डाल दिया है। एयरलाइन इंडिगो (इंटरग्लोब एविएशन लिमिटेड) ने दिसंबर 2025 में नई क्रू ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियमों के कार्यान्वयन में विफलता के कारण 2,000 से अधिक उड़ानें रद्द कर दी। हवाई यात्रा प्रणाली में व्यापक अव्यवस्था फैल गई। हजारों यात्री फंस गए, एयरपोर्ट पर अफरा-तफरी मच गयी। इस घटना से सबक लेते हुए भारत सरकार ने कड़ी करवाई करने की बात कही है।

इंडिगो की 60% से अधिक हिस्सेदारी

इंडिगो भारत की विमानन बाजार में 60% से अधिक हिस्सेदारी रखने वाली प्रमुख एयरलाइन है, जो प्रतिवर्ष 1 करोड़ से अधिक यात्रियों को सेवा प्रदान करती है। कंपनी की सफलता की कुंजी कम लागत वाली मॉडल (लो-कॉस्ट कैरियर) रही है, लेकिन यह मॉडल क्रू प्रबंधन में किफायत पर जोर देता है। दिसंबर 2022 में DGCA (डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन) ने पायलटों की थकान की शिकायतों के बाद नए FDTL नियम लागू किए, जो वैश्विक मानकों के अनुरूप थे।
इनमें साप्ताहिक आराम अवधि 36 से बढ़ाकर 48 घंटे और रात्रि लैंडिंग की सीमा 6 से घटाकर 2 कर दी गई। नियमों को दो चरणों में लागू किया गया। पहला जून 2025 में और दूसरा नवंबर 2025 में। जबकि अन्य एयरलाइंस जैसे एयर इंडिया ने अनुपालन किया, इंडिगो ने इसे पूरी तरह से लागू करने में चूक की।

2-4 दिसंबर 2025
उड़ानों में देरी शुरू; 200 से अधिक उड़ानें रद्द, मुख्य रूप से दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद में।
5 दिसंबर 2025
चरम संकट: 1,600 से अधिक उड़ानें रद्द; हजारों यात्री फंस गए, एयरपोर्ट पर अफरा-तफरी।
6-8 दिसंबर 2025
रद्दीकरण जारी; कुल 2,000+ उड़ानें प्रभावित; यात्री शादियों, अंतिम संस्कार और परीक्षाओं से चूक गए।
8 दिसंबर 2025
डीजीसीए ने शो-कॉज नोटिस जारी किया; सीईओ को स्पष्टीकरण मांगा; स्टॉक में 8.7% गिरावट।
9 दिसंबर 2025
सरकार ने 10% उड़ान कटौती का आदेश दिया; डीजीसीए ने 5% कटौती से बढ़ाकर 10% किया।

संकट के प्रमुख कारण –
नियमों का अपर्याप्त कार्यान्वयन- इंडिगो ने FDTL नियमों के दूसरे चरण को सही ढंग से लागू नहीं किया, जिससे पायलटों की कमी हो गई। कंपनी ने “अनपेक्षित परिचालन चुनौतियां, खराब मौसम और योजना में गलतियां” का हवाला दिया।
कम लागत मॉडल की सीमाएं- लीन ऑपरेशंस ने स्थिर समय में लाभ दिया, लेकिन नियामकीय परिवर्तनों के लिए लचीलापन की कमी थी। पायलटों ने ओवरटाइम और थकान की शिकायत की, जिसे “साइलेंट किलर” कहा गया।
विस्तार पर फोकस- नई अंतरराष्ट्रीय रूट्स लॉन्च करने में व्यस्त प्रबंधन ने क्रू रोटेशन जैसी “उबाऊ” डिटेल्स की उपेक्षा की।
बाजार प्रभुत्व: 60% बाजार हिस्सेदारी ने “एकाधिकार जैसी उदासीनता” पैदा की, जहां यात्री शिकायतों को नजरअंदाज किया गया।

यात्रियों ने किया भारी संकटों का सामना

-एयरलाइन इंडिगो की इस धोखे के कारण हजारों यात्री फंस गए ,उदाहरणस्वरूप, एक महिला अपने पति का शव कोलकाता ले जाने में असमर्थ रही। एयरपोर्ट पर रातें काटनी पड़ीं, शादियां और परीक्षाएं प्रभावित हुईं। नवंबर में ऑन-टाइम परफॉर्मेंस 84% से गिरकर 68% हो गई।
– 4.5 अरब डॉलर का मार्केट वैल्यू लॉस, रद्दीकरण से राजस्व हानि, रिफंड और मुआवजा। प्रतिष्ठा को गहरा आघात, पायलट भर्ती कठिन। प्रतियोगी जैसे एयर इंडिया और स्पाइसजेट ने अतिरिक्त उड़ानें जोड़ीं।
-विमानन क्षेत्र में विश्वास हानि, मूडीज ने चेतावनी दी कि नई नियमों से क्रू लागत बढ़ेगी।

सरकारी प्रतिक्रिया
-नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने 10% उड़ानें कम करने का निर्देश दिया (लगभग 220 उड़ानें प्रति दिन), सभी 138 गंतव्यों को कवर करते हुए। DGCA ने 5% से बढ़ाकर 10% किया ताकि संचालन स्थिर हो।
– शो-कॉज नोटिस, सीईओ को स्पष्टीकरण; मंत्री राम मोहन नायडू ने “कड़े कदम” की चेतावनी दी, उद्योग के लिए उदाहरण स्थापित करने का वादा किया।
– एयर इंडिया को अतिरिक्त उड़ानें जोड़ने का निर्देश ,किराया कैपिंग: 500 किमी तक ₹7,500, दिल्ली-मुंबई जैसी 1,000-1,500 किमी रूट्स पर ₹15,000।
-नई एयरलाइंस को प्रोत्साहन, एयरपोर्ट पहुंच सुनिश्चित, डुओपॉली रोकना ताकि प्रतिस्पर्धा बढ़े।

5 दिसंबर 2025 को DGCA ने किया समिति का गठन

सदस्य- चार सदस्यीय पैनल, जिसमें संयुक्त डीजी संजय के. ब्रह्मणे (अध्यक्ष), डिप्टी डीजी अमित गुप्ता, और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।
उद्देश्य- क्रू योजना (crew planning) में अंतरालों की पहचान।
FDTL नियमों के चरणबद्ध कार्यान्वयन (फेज 2, नवंबर 2025) के लिए परिचालन तैयारियों की समीक्षा।
संकट के कारणों का मूल्यांकन, जैसे विंटर शेड्यूल में वृद्धि (35 दिनों में ही ब्रेकडाउन) और पायलट कमी।
भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उपाय सुझाना।

समयसीमा- 15 दिनों में प्रारंभिक रिपोर्ट, लेकिन पूर्ण रिपोर्ट 20 दिसंबर 2025 तक।

FDTL क्या हैं?

FDTL का अर्थ है पायलटों की ड्यूटी अवधि, उड़ान समय, रात्रि ऑपरेशंस की संख्या और न्यूनतम आराम की सीमाएं। ये नियम पायलटों को थकान से बचाने के लिए सख्त सीमाएं लगाते हैं, क्योंकि थकान से निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होती है। DGCA के सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट (CAR) सेक्शन 7, सीरीज J, पार्ट III के तहत ये नियम लागू होते हैं।

FDTL मुख्य उद्देश्य-
पायलट थकान से संबंधित जोखिमों को कम करना।
वैश्विक मानकों (जैसे ICAO Annex 6) से संरेखण।
एयरलाइंस को फटिग रिस्क मैनेजमेंट सिस्टम (FRMS) अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना।

थकान से वैश्विक स्तर पर दुर्घटनाएं
ये नियम ICAO और यूरोपियन यूनियन एविएशन सेफ्टी एजेंसी (EASA) जैसे मानकों से प्रेरित हैं। थकान से वैश्विक स्तर पर 15-20% दुर्घटनाएं जुड़ी हैं। भारत में, जहां विमानन बाजार 2026 तक तीसरा सबसे बड़ा होगा, ये नियम सुरक्षा बढ़ाते हैं लेकिन क्रू की कमी (10-20%) से चुनौतियां पैदा करते हैं। FDTL नियम पायलट कल्याण और यात्री सुरक्षा के लिए आवश्यक हैं, लेकिन इन्हें प्रभावी बनाने के लिए एयरलाइंस को बेहतर योजना और भर्ती की जरूरत है। DGCA की निगरानी से उद्योग अधिक लचीला बनेगा।

पायलट संघ ने छूट की आलोचना की

इंडिगो ने संकट को स्वीकार करते हुए कहा कि संचालन अब स्थिर हैं, सभी गंतव्य बहाल, और ऑन-टाइम परफॉर्मेंस सामान्य। फरवरी 2026 तक FDTL में छूट प्राप्त की। कंपनी ग्राहक जरूरतों को संबोधित कर रही है और योजना गलतियों पर फोकस कर रही है। हालांकि, पायलट संघ ने छूट की आलोचना की, सुरक्षा पर सवाल उठाए।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह जेट एयरवेज और किंगफिशर जैसी विफलताओं की याद दिलाता है। भविष्य में, उच्च क्रू लागत, प्रतिष्ठा पुनर्निर्माण और प्रतियोगिता बढ़ सकती है। नियामक को मजबूत प्रवर्तन की जरूरत है ताकि सुरक्षा प्राथमिकता बने।

हवाई यात्रा के मामले में भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बाजार

हवाई यात्रा के मामले में भारत से आगे अमेरिका व चीन है जहां यात्री हवाई जहाजों की संख्या क्रमश: 8000 और 7300 है। भारत में यह संख्या सिर्फ 810 है। भारत में घरेलू व विदेशी दोनों मिलाकर 30 करोड़ से अधिक यात्री हवाई जहाज की यात्रा करते हैं। चीन में सालाना 70 करोड़ से अधिक यात्री हवाई यात्रा करते हैं जो भारत के मुकाबले दोगुना से अधिक है, लेकिन चीन में हवाई जहाज की संख्या भारत के मुकाबले आठ गुना से अधिक है।

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