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NSE की पूर्व CEO चित्रा रामकृष्ण को सीबीआई ने दिल्ली से किया गिरफ्तार
नई दिल्ली। रविवार की शाम सीबीआई ने को-लोकेशन घोटाले में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ( एनएसई ) की पूर्व CEO चित्रा रामकृष्ण को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया। रामकृष्ण को लोकल कोर्ट में आज पेश किया जाएगा। सीबीआई लोकल कोर्ट में रामकृष्ण की कस्टडी मांगेगी ताकि पूछताछ की जा सके।
इससे पहले शनिवार को दिल्ली कोर्ट ने NSE को-लोकेशन मामले में रामकृष्ण की गिरफ्तारी से पहले जमानत याचिका खारिज कर दी थी। सीबीआई ने जमानत का विरोध करते हुए दलील दी कि रामकृष्ण जांच में सहयोग नहीं कर रही हैं। सीबीआई इस मामले में पिछले 4 साल से जांच कर रही है। इससे पहले CBI 25 फरवरी को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के एक पूर्व शीर्ष अधिकारी आनंद सुब्रमण्यन को गिरफ्तार कर चुकी है। जांच एजेंसी ने कुछ हाई फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स को एक्सचेंज के नेटवर्क सर्वर्स तक कथित अनुचित पहुंच देने के मामले की जांच में आगे बढ़ने के साथ यह कार्रवाई की है।
क्या है को-लोकेशन घोटाला?
को-लोकेशन का मतलब है कि ब्रोकरेज हाउस अपने सर्वर एक्सचेंज के अहाते में लगाते हैं ताकि वो एनएसई के सर्वर से नजदीक रहे। नजदीक रहने के कारण ब्रोकरेज हाउस के सदस्य बहुत तेजी से एनएसई के सर्वर को एक्सेस कर सकते हैं। इससे उन्हें बाय और सेल ऑर्डर जल्दी-जल्दी प्लेस करने में मदद मिलती है।
कई ब्रोकरेज हाउस हैं जिन्होंने ये को-लोकेशन की सुविधा चुनी हैं। सेबी को 2015 में एक ब्रोकर से शिकायत मिली कि को-लोकेशन फैसेलिटी लेने वाले बाकी लोगों के मुकाबले ओपीजी सिक्योरिटीज को ज्यादा जल्दी डेटा मिल रहे हैं। और यह को-लोकेशन के सिद्धांत के खिलाफ है। को-लोकेशन में डेटा एक्सेस हर सदस्य के लिए पारदर्शी और बराबर होना चाहिए।
इस शिकायत के बाद ही सेबी ने जांच शुरू की। जांच में पता चला कि एनएसई सभी सदस्यों में बराबरी नहीं रख पाई है। सेबी को यह भी पता चला कि कंपनी के CEO रवि नारायण और चित्रा रामकृ्ष्णा के कार्यकाल में सबसे ज्यादा गड़बड़ियां हुई हैं और इसके लिए ये दोनों जिम्मेदार हैं। नारायण 2000 से लेकर 2013 तक एनएसई के MD और CEO थे। उनके बाद रामकृष्णा ने अप्रैल 2013 से लेकर दिसंबर 2016 तक पद संभाला। इससे पहले वह 2010 से 2013 तक कंपनी की ज्वाइंट MD और 2008 से लेकर 2010 तक डिप्टी MD थीं।
एनएसई के खिलाफ क्या थी शिकायत?
सेबी को 2015 में एक शिकायत मिली थी जिसमें NSE पर यह आरोप लगाया गया था कि वह Tick by Tick डेटा प्रोटोकॉल का इस्तेमाल करती है ना कि उसे ब्रॉडकास्ट करती है। Tick by Tick डेटा प्रोटोकॉल में डेटा एक के बाद एक आता है। यानी इसमें किसी एक ब्रोकर के पास डेटा सबसे पहले आएगा और दूसरे के पास उसके बाद। जबकि ब्रॉडकास्ट में डेटा एकसाथ सभी ब्रोकर के पास पहुंचता। ऐसे में जिस ब्रोकर के पास डेटा सबसे पहले पहुंचता था वह कम लोड में सर्वर से कनेक्ट कर लेता था जिसका फायदा उसे दूसरों के मुकाबले जल्दी मिलता था।
शिकायतकर्ता का आरोप था कि Omnesys Tech को इस Tick by Tick प्रोटोकॉल फीचर की जानकारी थी। इस कंपनी का दूसरा सबसे बड़ा शेयरहोल्डर NSE था। सेबी के पास पहुंची शिकायत के मुताबिक, OPG सिक्योरिटीज ने Omnesys से किसी को नियुक्त कर लिया था। साथ ही NSE डेटासेंटर स्टाफ के साथ भी “कुछ डील” कर ली थी ताकि उसे पता चले कि वह खास सर्वर कब ऑन हो रहा है जिसपर लोड सबसे कम है। इससे दूसरे ब्रोकरेज हाउस के बजाय OPG सिक्योरिटीज को ज्यादा फायदा होता था।