‘धन के लिए धर्म को ठुकराने वाले’ जनता के जमीर को मारना जानते हैं
सपनों के सौदागर जो सपने जनता को बेंच रहे हैं उस सपने को खुद नागरिकों ने ही बुना है। कुछ नागरिकों के विश्व गुरु बनने का सपना है, कुछ के सपने हैं अपने निजी धर्म को सर्वोच्च प्रदर्शित करने का, कुछ के पूँजीपति बनने का सपना है। कुछ के गुण्डे, आतंकी और डॉन बनने का सपना है। गजनवी की नाजायज औलादों का सपना है इस देश को लुटना।
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