द्रष्टा डेस्क। भारतीय सेना की अत्यंत सख्त बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था ध्वस्त कर हथियारों सहित कई उपकरण चोरी होने का मामला सामने आया है। तेलंगाना के सिकंदराबाद छावनी क्षेत्र के बोलारम स्थित भारतीय सेना की 20 वीं मद्रास रेजिमेंट के उच्च सुरक्षा वाले हथियार भंडारगृह से भारी मात्रा में सेवा हथियारों, मैगजीनों, गोला-बारूद और अन्य उपकरणों की चोरी हो गयी है। हथियारों और गोला-बारूद की चोरी की यह घटना सुरक्षा में बड़ी चूक या साज़िश है ?जैसे कई देश की सुरक्षा के लिए गंभीर सवाल खड़े करती है।
घटना 31 अगस्त 2026 सोमवार को सुबह करीब 7:50 बजे सेना के जवानों को चोरी का पता तब चला जब सेना के जवानों ने भंडारगृह खोला तो ताले और हथियार रखने वाले बॉक्स जबरन तोड़े हुए मिले।
चोरी हुई सामग्री का विवरण
एफआईआर और सेना की शिकायत के अनुसार, कुल 12 आग्नेयास्त्र गायब बताए गए हैं। इनमें शामिल हैं –
पांच मैगजीनों के साथ चार 7.62×39 मिमी AK-203 असॉल्ट राइफलें
तीन मैगजीनों के साथ एक 5.56 मिमी INSAS 1B1 राइफल
12 मैगजीनों के साथ छह 9 मिमी Auto 1A पिस्तौलें
एक मैगजीन के साथ एक नागरिक 6.35-बोर पिस्तौल
इसके अलावा 21 मैगजीन, एक पैसिव नाइट-विजन बाइनोकुलर और 1,800 से अधिक राउंड गोला-बारूद भी चोरी हो गए। गोला-बारूद में AK-203 के लिए करीब 720 राउंड, 9 मिमी पिस्तौलों के लिए करीब 1,120 राउंड, INSAS के 11 बॉल राउंड, पांच ट्रेसर और 20 ब्लैंक राउंड शामिल हैं। चोरी की गई संपत्ति का अनुमानित मूल्य करीब 15 लाख रुपये बताया गया है।
हथियारों और गोला-बारूद का अंतिम भौतिक सत्यापन 30 अगस्त 2026 को शाम 6 बजे भंडारगृह बंद करने से पहले किया गया था। चोरी कब हुई इसकी जानकारी अभी नहीं मिल सकीय है।
जांचकर्ताओं के लिए बड़ा रहस्य
20 वीं मद्रास रेजिमेंट की मुख्य टुकड़ी उस समय राजस्थान के पोखरण फायरिंग रेंज या रेगिस्तानी क्षेत्र में फील्ड फायरिंग ट्रेनिंग के लिए गई हुई थी। परिसर में केवल सीमित रियर पार्टी करीब 100 जवान गार्ड ड्यूटी और आवश्यक कार्यों के लिए मौजूद थे। भंडारगृह क्षेत्र में प्रवेश सीमित और अधिकतर सैन्यकर्मियों तथा कुछ नागरिक हाउसकीपिंग कर्मचारियों तक ही सीमित है। चार सुरक्षा गेटों के बावजूद चोरी हो जाना और हथियारों को छावनी क्षेत्र से बाहर निकाल ले जाना जांचकर्ताओं के लिए बड़ा रहस्य है।
एक से अधिक चोरों की संलिप्तता
कुछ रिपोर्टों में सीसीटीवी बंद होने और गार्डों की संख्या कम होने का जिक्र है। हथियारों का वजन और मात्रा देखते हुए एक से अधिक व्यक्तियों की संलिप्तता का अनुमान लगाया जा रहा है। जांच में अंदरूनी व्यक्ति की भूमिका पर मजबूत शक जताया जा रहा है, क्योंकि बाहरी व्यक्ति के लिए इतनी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सेंध लगाना बेहद मुश्किल है।
पुलिस और सेना की कार्रवाई
मद्रास रेजिमेंट के लेफ्टिनेंट कर्नल मेयंक गोवितिरकर की शिकायत पर बोलारम पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 331(4) (घर में सेंधमारी या हाउस-ब्रेकिंग) और 305 (विशेष संरक्षित स्थान में चोरी) के तहत मामला दर्ज किया गया। मलकाजगिरि पुलिस कमिश्नरेट के वरिष्ठ अधिकारी जांच में शामिल हैं।
सेना ने आंतरिक जांच शुरू कर दी है। कई कर्मियों से पूछताछ चल रही है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, अग्निवीर योजना के तहत भर्ती हुए चार जवानों और नागरिक कर्मचारियों सहित कुछ लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया या उनसे पूछताछ की जा रही है। औपचारिक गिरफ्तारियों की पुष्टि अभी आधिकारिक रूप से नहीं हुई है। हथियारों को छावनी से बाहर निकालने की प्रक्रिया और संभावित मकसद जैसे अवैध कब्जा, दुरुपयोग या तस्करी आदि पर फोकस किया जा रहा है।
छावनी क्षेत्र में बढ़ाई गयी सुरक्षा
घटना के बाद सिकंदराबाद छावनी क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। तेलंगाना सरकार ने छावनी क्षेत्र के स्कूलों को आगे के आदेश तक ऑनलाइन कक्षाएं चलाने की सलाह दी है। पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट जारी है। सेना ने हथियारों और गोला-बारूद को तुरंत खोजने तथा दोषियों की पहचान के लिए पुलिस से तत्काल कार्रवाई की मांग की है, क्योंकि इन सेवा हथियारों के अनधिकृत कब्जे या दुरुपयोग का खतरा है।
सेना में चोरी के अन्य मामले
2019 (सूरतगढ़, राजस्थान – 50 आर्मर्ड रेजिमेंट)- दो INSAS राइफलें, चार मैगजीन और 1,500 से अधिक राउंड गोला-बारूद चोरी। एक जवान द्वारा घर भेजने/बेचने के इरादे से चोरी। कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी ने पूरी चेन ऑफ कमांड (कमांडेंट से लेकर क्वार्टर मास्टर तक) को लापरवाही का दोषी ठहराया।
2019 (पचमढ़ी, मध्य प्रदेश – Army Education Corps)-दो INSAS राइफलें चोरी (सिक्ख रेजिमेंट के जवान और साथी द्वारा)।
अगस्त-सितंबर 2026 (सिकंदराबाद छावनी, तेलंगाना – 20 मद्रास रेजिमेंट)- 12 हथियार (4 AK-203 असॉल्ट राइफल, 1 INSAS, 6-7 पिस्तौलें, 1 नागरिक पिस्तौल), 21 मैगजीन, नाइट-विजन बाइनोकुलर और 1,800+ राउंड गोला-बारूद। ताले तोड़े गए। मुख्य यूनिट ट्रेनिंग पर थी। अग्निवीरों सहित पूछताछ चल रही है। अंदरूनी संलिप्तता का शक।
पुलिस (राज्य पुलिस) और मालखाना से संबंधित मामले
पुलिस थानों के मालखाना (evidence/armoury room) से चोरी के मामले अधिक बार सामने आए, क्योंकि पहुंच और निगरानी अपेक्षाकृत कमजोर होती है।
साल 2014-2018 मणिपुर में पुलिस आर्मरी से 56 नई पिस्तौलें और 58 मैगजीन चोरी (DGP पूल)। मणिपुर राइफल्स कर्मी ही अंदरूनी संलिप्त थे।
साल 2013-18 (केरल – Special Armed Police Battalion, CAG रिपोर्ट 2020) – 25 INSAS राइफलें और 12,061 लाइव कारतूस गायब हो गए। रिकॉर्ड में ओवरराइटिंग, कवर-अप के प्रयास। पुलिस ने बाद में दावा किया कि राइफलें सुरक्षित थीं (रिकॉर्डिंग एरर), लेकिन कारतूसों की कमी बनी रही।
2024 (मुरैना, मध्य प्रदेश – SAF आर्मरी): 268 कारतूस (9mm और SLR) चोरी। कंपनी कमांडर निलंबित हुआ।
2025-26 (फरीदाबाद, हरियाणा – Sector 8 पुलिस स्टेशन मालखाना)- 32 लाइसेंसी हथियार (विदेशी पिस्तौल सहित) चोरी। ITI ट्रेनी द्वारा 6 महीनों में चुराकर अंतरराज्यीय नेटवर्क को बेचे गए। 20 गिरफ्तार, सभी हथियार बरामद। ASI निलंबित हुआ।ऑडिट/CAG रिपोर्ट में गड़बड़ियां
केरल पुलिस (CAG 2020) की रिपोर्ट के अनुसार कारतूस गायब और रिकॉर्ड में की गयी हेराफेरी ।
आर्मी/ऑर्डनेंस फैक्टरी (विभिन्न CAG रिपोर्ट्स)- मुख्य रूप से दोषपूर्ण गोला-बारूद, गुणवत्ता समस्याएं, रिजेक्शन और नुकसान (जैसे ₹62 करोड़ का नुकसान दोषपूर्ण 155mm गोला-बारूद पर)। हथियारों के बड़े पैमाने पर “गायब” होने की बजाय उत्पादन और स्टॉक मैनेजमेंट की कमियां।
कई राज्य पुलिस में मालखाना ऑडिट में स्टॉक रजिस्टर की गड़बड़ी, ओवरराइटिंग और अनअकाउंटेड आइटम नियमित रूप से पाए जाते हैं।
पुलिस में अधिक मालखाना चोरी नियमित
विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार मणिपुर में 5,600 से 6,020 सरकारी हथियार लूटे गए। इनमें शामिल थे-
AK-47 / AK सीरीज राइफलें (245+)
INSAS राइफलें (973+)
SLR (1,600+)
.303 राइफलें, कार्बाइन, LMG, पिस्तौल, मोर्टार आदि।
साथ में 5-6 लाख राउंड गोला-बारूद, ग्रेनेड, बुलेटप्रूफ जैकेट आदि।
4 मई 2023: Manipur Police Training College (Pangei) से सैकड़ों हथियार।
28 मई 2023: 8th IRB headquarters (Khabeisoi) से बड़ी लूट।
अन्य थाने और कैंप भी निशाने पर रहे।

2014-2026 के बीच दर्जनों छोटी-बड़ी घटनाएं रिपोर्ट हुईं। सेना में बड़े मामले 5-10 प्रमुख, पुलिस में अधिक मालखाना चोरी नियमित।
मणिपुर 2023 अकेला हजारों हथियारों की चोरी डकैती शामिल है।
अंदरूनी संलिप्तता सबसे आम, लापरवाही, कमजोर निगरानी ,रात में सीसीटीवी बंद, कम गार्ड, रियर पार्टी के दौरान ढील, हिंसा/भीड़ प्रमुख कारण मिला। आंतरिक जांच, निलंबन, कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी में हथियार अपराधियों/उग्रवादियों के पास होना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है।
RFID टैगिंग, सख्त लेखांकन, सीसीटीवी, बायोमेट्रिक पहुंच, नियमित ऑडिट। फिर भी मानवीय चूक बनी रहती है।
बहरहाल, ये घटनाएं दर्शाती हैं कि कागजी प्रोटोकॉल मजबूत होने के बावजूद व्यावहारिक अनुपालन में कमियां हैं। मणिपुर जैसी घटनाएं असाधारण थीं, जबकि रोजमर्रा के मामलों में अंदरूनी लापरवाही प्रमुख है।
सुरक्षा प्रोटोकॉल पर सवाल
AK-203 असॉल्ट राइफल भारतीय सेना में INSAS को चरणबद्ध तरीके से बदलने की प्रक्रिया का हिस्सा हैं। ये अपेक्षाकृत नई राइफलें हैं, जो मुख्य रूप से इन्फैंट्री यूनिट्स के लिए हैं। शांतिपूर्ण स्थान पर तैनात इकाई में इनकी मौजूदगी सेना की क्रमिक इंडक्शन नीति के अनुरूप है। फिर भी उच्च-सुरक्षा भंडारगृह से इनके गायब होने से सुरक्षा प्रोटोकॉल पर सवाल उठे हैं।
सीसीटीवी फुटेज, ड्यूटी रोस्टर, पहुंच वाले कर्मियों और सुरक्षा व्यवस्था की गहन समीक्षा की जा रही है। हथियार अभी तक बरामद नहीं हुए हैं सेना और पुलिस दोनों इस संवेदनशील मामले को प्राथमिकता दे रहे हैं।
भारतीय सेना की सुरक्षा प्रोटोकॉल विश्व स्तर पर मजबूत माने जाते हैं, लेकिन किसी भी सिस्टम की सफलता उसके सख्त अनुपालन पर निर्भर करती है। कोटे-मैगजीन सिस्टम, लेखांकन, गार्ड व्यवस्था और पहुंच नियंत्रण मिलकर एक मजबूत ढांचा बनाते हैं। हालिया घटना जैसी घटनाओं से सबक लेकर निगरानी बढ़ाने, टेक्नोलॉजी (RFID, बेहतर सीसीटीवी) का विस्तार करने और कार्मिक प्रशिक्षण को और मजबूत करने की जरूरत है। सुरक्षा कोई एक बार का काम नहीं, बल्कि निरंतर सतर्कता और जवाबदेही की मांग करती है।बहरहाल, यह घटना न केवल स्थानीय सुरक्षा बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर सैन्य प्रतिष्ठानों की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की आवश्यकता को रेखांकित करती है।