नई दिल्ली (द्रष्टा डेस्क )— भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में हाल के वर्षों में अनुभवी वैज्ञानिकों और इंजीनियरों का पलायन एक गंभीर मुद्दा बन गया है। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पिछले एक वर्ष में 100 से 120 से अधिक वैज्ञानिकों ने इस्तीफा दिया है, जिसमें गगनयान, चंद्रयान-3, SpaDeX और LVM-3 जैसे महत्वपूर्ण मिशनों से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हैं। इस विकास ने केंद्र की बीजेपी सरकार को चिंतित किया है, जिसके परिणामस्वरूप 14 जुलाई 2026 को अंतरिक्ष विभाग ने एक आंतरिक निर्देश जारी कर Group-A वैज्ञानिकों और तकनिकी अधिकारियों के इस्तीफे/VRS को सख्त नियमों के अधीन कर दिया है।
इस्तीफा देने वाले वैज्ञानिकों के नाम चर्चा में
ISRO ने आधिकारिक रूप से इस्तीफों की सटीक संख्या जारी नहीं की है, लेकिन कई विश्वसनीय मीडिया रिपोर्टों में 100-120+ वैज्ञानिकों के पलायन की पुष्टि हुई है। प्रभावित केंद्रों में यू.आर. राव सैटेलाइट सेंटर (URSC) सबसे ऊपर है, जहां सबसे अधिक इस्तीफे दर्ज किए गए। अन्य प्रभावित केंद्रों में विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC) शामिल है। विक्टर जोसेफ (VSSC, LVM-3 प्रोजेक्ट डायरेक्टर) और आदित्य रल्लापल्ली (URSC, SpaDeX और Chandrayaan-3 से जुड़े) जैसे वैज्ञानिकों के नाम चर्चा में रहे हैं।
ISRO की क्षमता हो रही है प्रभावित
जबकि ऐतिहासिक डेटा 2012-2017 में 289 और 2018-2022 में 381 वैज्ञानिकों ने ISRO से इस्तीफा दे दिया। ज्यादातर इस्तीफे इसी साल आए हैं। इससे पता चलता है कि ISRO में attrition rate 2-3% रहा है, लेकिन युवा वैज्ञानिकों में यह अधिक है।यह पलायन ISRO की क्षमता को प्रभावित कर रहा है, खासकर भारत का पहला मानव मिशन ( गगनयान ) जैसे रणनीतिक प्रोजेक्ट्स पर, जहां अनुभवी मानव संसाधन की कमी समयसीमा और गुणवत्ता दोनों को जोखिम में डाल सकती है।
सरकार की प्रतिक्रिया
14 जुलाई 2026 के आंतरिक मेमो के अनुसार गगनयान, चंद्रयान, लॉन्च व्हीकल और अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं से जुड़े ग्रुप -A वैज्ञानिकों/तकनीकी अधिकारियों के इस्तीफे या VRS अब स्थानीय केंद्र स्तर पर स्वीकार नहीं किए जाएंगे। हर मामले को अंतिम मंजूरी के लिए अंतरिक्ष विभाग के मुख्यालय को भेजा जाएगा।
यह कदम टैलेंट ड्रेन को रोकने का प्रयास है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह लक्षणों का इलाज है, न कि मूल समस्या का।
इस्तीफों के संभावित कारण।
ISRO के पूर्व और वर्तमान वैज्ञानिकों से बातचीत तथा रिपोर्टों के आधार पर मुख्य कारण-
वेतन और अवसर – सरकारी वेतन (entry-level में सीमित) बनाम प्राइवेट स्पेस स्टार्टअप्स (जैसे Skyroot, Agnikul) या विदेशी कंपनियों में बेहतर पैकेज, बोनस और विकास। IN-SPACe (2020) के बाद प्राइवेट सेक्टर में ~200 स्टार्टअप्स उभरे हैं, जो ISRO टैलेंट को आकर्षित कर रहे हैं।
कार्यभार और दबाव-
उच्च precision (माइक्रॉन स्तर) वाली assembly, 24×7 शिफ्ट्स (जैसे Operation Sindoor में 400+ वैज्ञानिकों का योगदान), लेकिन सीमित रिसर्च फ्रीडम और बौद्धिक चुनौती की कमी। कई युवा वैज्ञानिक निराशा व्यक्त करते हैं कि 5-10 साल बाद क्लासमेट्स 10 गुना कमाते हैं।
संस्थागत मुद्दे-
बजट सीमाएं, जनशक्ति की कमी,नौकरशाही की बाधाएं और प्रोमोशन/रिसर्च ऑपर्चुनिटीज़ की कमी। VSSC और SAC जैसे केंद्रों में संघर्षण सबसे अधिक।
बाहरी आकर्षण-
प्राइवेट सेक्टर में तेज़ करियर ग्रोथ, कम दबाव वाली जॉब्स (एक पूर्व वैज्ञानिक ने रेस्तरां मैनेजमेंट चुना)।
बहरहाल , सभी इस्तीफे “ब्रेन ड्रेन ” नहीं; कुछ VRS (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ) हैं। ISRO का कुल attrition अभी भी कम है, लेकिन मुख्य मिशन पर असर गंभीर। महिलाओं और विविधता पर भी चर्चा होती रही, लेकिन यह मुद्दा मुख्यतः अवधारण का है।
प्रभाव और प्राइवेट सेक्टर का उदय
मिशनों पर Gaganyaan (2027 लक्ष्य) और अन्य प्रोजेक्ट्स में देरी का खतरा। ज्ञान की हानि (संस्थागत स्मृति) महत्वपूर्ण है।राष्ट्रीय स्तर पर भारत की अंतरिक्ष संबंधी महत्वाकांक्षाएं (चंद्रयान, मंगलयान, Aditya-L1 की सफलता के बाद) को चुनौती। प्राइवेट सेक्टर का उदय सकारात्मक है, लेकिन ISRO कीनेतृत्व की भूमिका बनी रहनी चाहिए।
खास मामले: महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में अवधारण के लिए बांड्स या इन्सेन्टिव्स की मांग बढ़ सकती है। लंबे समय में, बेहतर वेतन, R&D फंडिंग और ऑटोनोमी जरूरी।
विशेषज्ञों की राय
कई पूर्व ISRO अधिकारी मानते हैं कि प्रशासनिक ब्लॉक अस्थायी हैं। मूल समाधान बेहतर मुआवजा, चुनौतीपूर्ण कार्य वातावरण और कैरियर की प्रगति है। ISRO में प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहन, निजी सहयोग बढ़ाना, और युवा वैज्ञानिकों के लिए मेंटरशिप प्रोग्राम। ISRO भारत का गौरव है, जिसने Chandrayaan-3 जैसी उपलब्धियां हासिल कीं। यह पलायन एक wake-up call है। सरकार की सख्ती तत्काल राहत दे सकती है, लेकिन टिकाऊ बनाए रखने के लिए संरचनात्मक सुधार जरूरी हैं। स्थिति पर नजर रखी जा रही है, और आगे अपडेट्स आने की उम्मीद है।

