देश में अमृतकाल की बात करने वाले सत्ताधीशों के नक़ाब उतरने लगे हैं। पंचतंत्र की कहानी वाले गधे को शेर बताने वालों का दिल टूटने लगा है। अपने निज स्वार्थ और अहंकार के कारण अक़्ल से अंधे अब बिलबिलाने लगे हैं। सत्ता बचाने के लिए सत्ताधीश अंधभक्तों की बलि चढ़ाने लगे हैं।
संसद द्वारा बनाये गए असंवैधानिक क़ानून के संरक्षण में चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार गुप्ता ने लोकतंत्र को कुचलने का खुल्लम खुल्ला खेल शुरू कर दिया। इस खेल को पकड़ना बहुत आसान था लेकिन सरकार की संवैधानिक जांच एजेंसियों और सत्ताधीशों के अनैतिक व्यवहार से डरे नागरिक इस खेल को अपनी नियती समझ बैठे थे। नरेंद्र मोदी की सत्ता ने अनैतिक बल प्रयोग कर लगभग 13 करोड़ मतदाताओं को मतदान से वंचित कर दिया।
द्रष्टा इसलिए द्रष्टा है कि वह आम नज़रिये से घटनाओं को नहीं देखता बल्कि घटनाओं की उत्पत्ति के तथ्य को परख कर सत्य को देखता है। भारतीय परिवेश में पले- बढ़े लोगों के मन, वचन और कर्म को पीढ़ी दर पीढ़ी समझने वाले तानाशाही सत्ता और सत्ताधीश को भी समझ सकते हैं।
नरेंद्र मोदी का दोहरा व्यक्तित्व
द्रष्टा ने प्रत्येक बार यह बताया है कि नरेंद्र मोदी बहिर्मुखी स्वभाव के व्यक्ति हैं। बहिर्मुखी स्वभाव के व्यक्ति में आत्म चिंतन से उपजे ज्ञान और विवेक की भारी कमी होती है। इस कारण बुरी लत लग जाना, सनकी मिज़ाज़, अपने स्वार्थ सिद्धि के लिए दूसरों की शक्तियों का उपयोग करना इन व्यक्तियों के स्वभाव में आ जाता है। ऐसे व्यक्तियों के आचरण में दोहरा व्यक्तित्व या पर्सेनॉलिटी डिसऑर्डर नामक मनोविकार तेजी से पकड़ता है।
नरेंद्र मोदी लोकेष्णा नामक मनोविकार से ग्रसित हैं। व्यक्ति को छपास के सहारे अपने अहंकार को बचाने के लिए दूसरों पर निर्भर होना ही पड़ता है। महाभारत के दुष्ट चरित्र दुर्योधन ने भी अपने अहंकार की रक्षा के लिए कर्ण को राजा बनाया था। कर्ण के सहारे उसने कई राज्यों को जीता था। और कर्ण के सहारे ही वह धर्म पर विजय चाहता था। परन्तु दुर्योधन विजय न पा सका।
नई पीढ़ी के बच्चों और नौवजवानों ने तानाशाही सरकार को खुली चुनौती दे दी है। 2 अक्टूबर 2026 को जेन जी का दूसरा आंदोलन शुरू हो चूका है। राजधानी दिल्ली में कांग्रेस पार्टी का छात्र संगठन एनएसयूआई और आर्थिक राजधानी मुम्बई में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP )ने चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और गृह मंत्री अमित शाह का इस्तीफा मांग लिया है। सड़कों पर जेल भरने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा है। प्रदर्शनकारियों और गैर कानूनी पुलिस कर्मियों में जबरदस्त भिड़ंत जारी है।
भारत में अंग्रेजी हुकूमत के दमनकारी नीतियों की तरह ही नरेंद्र मोदी कि सरकार देश के नागरिकों के मनोबल को तोड़ने में लगी है। पुलिस द्वारा बच्चों के साथ दरिंदगी, लड़कियों के साथ बलात्कार व इसे दिखाने वाले मीडिया कर्मियों के साथ मारपीट कर सरकार ने कानून की धज्जियाँ उड़ा दी है।
होम मिनिस्टर मत बनो गुंडे बन जाओ
मुम्बई में प्रदर्शन कर रही (CJP) के अभिजीत दीपिके ने 10 अक्टूबर 2026 को दिल्ली के जंतर – मंतर पर जेन जी को जुटाने के लिए कहा है। और गृह मंत्री अमित शाह को सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए अभिजीत ने कहा है कि ‘ मोटा भाई से कहना चाहता हूँ कि इस बार लाठी चलाने का आर्डर मत देना , एक गलती तुमने कर दी थी 20 जुलाई को बच्चों पर लाठीयां चलाने का आर्डर देकर, दूसरी गलती करी तो भाई इस बार तेरा इस्तीफा होगा अगर गुंडागर्दी करनी है तो देश का होम मिनिस्टर मत बनो गुंडे बन जाओ ‘।
गुंडागर्दी करने पर तड़ीपार की सजा पा चुके बीजेपी नेता अमित शाह अभी भारत सरकार के गृह मंत्री हैं। कॉकरोच के पहले आंदोलन से ही दबाव में आ चुके अमित शाह के लिए खतरे की घंटी बज चुकी है। जेन जी के निशाने पर नरेंद्र मोदी पहले से ही सेट हैं। चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तिकड़मों से राज्यों की सत्ता पर काबिज़ होकर फुले न समाने वाली बीजेपी जमींदोज़ होने के खतरे को महसूस कर रही है। उत्तर प्रदेश सहित अन्य चुनावों में नरेंद्र मोदी को अपने बेईमान इरादों के साथ सत्ता में बने रहने के लिए ज्ञानेश कुमार की आवश्यकता है। जिस प्रकार बिना नमक के भोजन बेकार है उसी प्रकार बिना ज्ञानेश के चुनाव नरेंद्र मोदी के लिए बेकार है।
अपना ज्ञान बघारने के लिए नरेंद्र मोदी ने जब सुभाषितानि का यह श्लोक पढ़ा तो देश के लोगों ने उनका मजाक उड़ाया। सोशल मीडिया में खूब मिम्स बनाये गए। जेन जी ने अपने प्रदर्शनों में गालियों के साथ इस श्लोक की लाइनों का नरेंद्र मोदी के लिए उपयोग किया। द्रष्टा इस श्लोक को केवल वास्तविक अर्थ में ही प्रयोग कर रहा है।
अङ्गेन गात्रं नयनेन वक्त्रं न्यायेन राज्यं लवणेन भोज्यम्।
धर्मेण हीनं खलु जीवितं च न राजते चन्द्रमसा विना निशा॥
अर्थ: जैसे अंगों के बिना शरीर, नेत्रों (आँखों) के बिना मुख (चेहरा), न्याय के बिना राज्य और नमक के बिना भोजन शोभा नहीं देता (या फीका रहता है), वैसे ही धर्म और सदाचार के बिना मानव जीवन और चंद्रमा के बिना रात्रि शोभा नहीं पाते हैं।
द्रष्टा देख रहा है कि झूठ , अनैतिकता, पाखंड , छल और प्रपंचों पर टिकी नरेंद्र मोदी की सत्ता अपने ही षड्यंत्रों के दलदल में धंस रही है। द्रष्टा देख रहा है कि कैसे एक – एक करके मंत्री , नौकरशाह और नरेंद्र मोदी के प्रचारक इस दलदल से निकलकर भागने कि कोशिश कर रहे हैं। नरेंद्र मोदी को यह देखकर ज्ञानेश बिन चुनाव जैसे लवणेन भोज्यम् का विचार आना स्वभाविक है।
…..क्रांति कथन जारी है
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