Drashta News

8.7 करोड़ युवा न पढ़ रहे, न काम कर रहे, न प्रशिक्षण ले रहे – नीति आयोग

DrashtaNews

नई दिल्ली /द्रष्टा डेस्क। भारत में जेन जी के ‘स्कूल ठीक करो ‘ अभियान ने राजनेताओं के प्रपंच और नौकरशाही की पोल खोल कर रख दी है। अब इसी बीच नीति आयोग की नई रिपोर्ट “Reimagining Skilling for Viksit Bharat@2047” ने भी देश के युवाओं की स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है।

इस रिपोर्ट के अनुसार, 15 से 29 वर्ष की आयु के लगभग 8.7 करोड़ भारतीय न तो शिक्षा में हैं, न रोजगार में और न ही किसी प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल हैं। इन्हें NEET (Not in Education, Employment or Training) श्रेणी में रखा गया है।
यह अनुमान राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (NSS) के 78वें दौर (2021) के आंकड़ों पर आधारित है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस समूह का लगभग 88 प्रतिशत हिस्सा घरेलू कार्यों और देखभाल संबंधी जिम्मेदारियों में लगा हुआ है। महिलाओं के लिए घरेलू बोझ, सुरक्षा, आवागमन और देखभाल की जिम्मेदारियां प्रमुख बाधाएं बनी हुई हैं।

अवश्य पढ़िए : PM नरेंद्र मोदी के जेन जी फ्रेंड्स को कंगना रनौत ने बोला ‘जनरेशन गटर’


शिक्षा और रोजगार में बड़ा अंतर
रिपोर्ट में शिक्षा से रोजगार के संक्रमण में गंभीर असंगति सामने आई है। केवल 8.25 प्रतिशत स्नातक अपनी योग्यता के अनुरूप नौकरियों में कार्यरत हैं। स्नातकों में बेरोजगारी 13 प्रतिशत और महिला स्नातकों में 20.4 प्रतिशत तक पहुंच गई है। सामान्य स्नातक डिग्री (बीए, बीएससी, बीकॉम) करने वाले लाखों युवा सरकारी नौकरियों की कतार में खड़े हैं, जबकि उपलब्ध पद बहुत कम हैं।
नीति आयोग ने देश के लगभग 60 करोड़ शिक्षार्थियों और कार्यबल को पांच प्रमुख खंडों में बांटा है—स्कूल छात्र, उच्च शिक्षा के विद्यार्थी, औपचारिक-अनौपचारिक कार्यबल, NEET युवा और महिलाएं। इनमें से NEET युवा और महिलाएं सबसे अधिक कमजोर स्थिति में हैं।

क्या हैं प्रमुख सिफारिशें?
रिपोर्ट में स्किलिंग व्यवस्था को पूरी तरह से नया रूप देने का प्रस्ताव किया गया है। मुख्य सुझाव इस प्रकार हैं:-

-कक्षा 6 से 12 तक सभी छात्रों के लिए सामान्य रोजगारपरकता और उद्यमिता कौशल (GEES) अनिवार्य करना।
-कक्षा 9 से स्थानीय और राष्ट्रीय मांग के आधार पर ‘कौशल ट्रैक’ शुरू करना।
-उच्च शिक्षा में उद्योग साझेदारी और अप्रेंटिसशिप आधारित डिग्री-डिप्लोमा कार्यक्रम बढ़ाना।
-डिजिटल स्किल्स पासपोर्ट (APAAR आईडी से जुड़ा) जारी करना, जिसमें प्रमाणपत्र, अनुभव और कौशल दर्ज हों।
कौशल आधारित भर्ती को बढ़ावा देना, जहां डिग्री अनिवार्य न हो।
-NEET युवाओं और महिलाओं के लिए सस्ती, लचीली और स्थानीय प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराना।

अवश्य पढ़िए : CJP की सभी मांगों के साथ धर्मेंद्र प्रधान का हुआ इस्तीफा, छात्रों ने मेलोडी चॉकलेट खिलाकर धरना किया ख़त्म

रिपोर्ट में कहा गया है कि स्किलिंग को केवल कार्यक्रमों का संग्रह नहीं, बल्कि जीवनभर सीखने का एकीकृत तंत्र बनाना होगा। इसमें कई बार प्रवेश, बाहर निकलने और फिर से जुड़ने के विकल्प होने चाहिए।
विकसित भारत 2047 का लक्ष्य
नीति आयोग का मानना है कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए युवाओं को सही कौशल देना सबसे महत्वपूर्ण है। 2014-15 से अब तक 7.67 करोड़ से अधिक लोगों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, लेकिन परिणाम असमान रहे हैं। रिपोर्ट में राज्यों को मुख्य जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे स्थानीय जरूरतों के अनुसार स्किलिंग व्यवस्था को मजबूत करें।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि शिक्षा, कौशल और रोजगार के बीच की दूरी नहीं घटी तो भारत का जनसांख्यिकीय लाभ बोझ बन सकता है।

Exit mobile version