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साल 2023 में दो लाख करोड़ की GST चोरी के 6323 मामले, 140 लोग हुए गिरफ्तार

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नई दिल्ली (एजेंसी)। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर व सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) के अधीन काम करने वाले माल व सेवा कर आसूचना महानिदेशालय (DGGI) ने वर्ष 2023 में GST चोरी के 6323 मामलों का भंडाफोड़ किया, जिसके तहत 1,98,324 करोड़ की जीएसटी चोरी की गई थी।

140 लोगों को किया गया गिरफ्तार
जीएसटी चोरी करने वालों में आनलाइन गेमिंग, कैसिनो, इंश्योरेंस सेक्टर व फेक इनपुट टैक्स क्रेडिस (आइटीसी) संबंधी कंपनियां प्रमुख रूप से लिप्त पाई गई। जीएसटी की इतनी बड़ी चोरी के आरोप में 140 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

वित्त मंत्रालय ने क्या कहा?
वित्त मंत्रालय का कहना है कि जीएसटी चोरी को लेकर सरकार काफी सख्त है और इस मामले में सख्ती बढ़ती जाएगी। वर्ष 2022 में जीएसटी चोरी के 4,273 मामले पकड़ में आए थे जिसके तहत 90,499 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी की गई थी। इनपुट टैक्स क्रेडिट से जुड़ी चोरी को रोकने के लिए पिछले साल डीजीजीआइ की तरफ से विशेष अभियान चलाया गया ताकि सरकारी राजस्व के नुकसान को बचाया जा सके।
पिछले साल आइटीसी के नाम पर जालसाजी के 2335 मामले सामने आए जिसके तहत 21,078 करोड़ रुपये की जालसाजी की गई थी। इन मामलों में 116 लोगों को गिरफ्तार किया गया। वर्ष 2022 में आइटीसी के नाम पर सरकार को चूना लगाने के 1,646 मामलों का भंडाफोड़ किया गया था। आइटीसी जालसाजी के तहत बिना निर्यात किए ही सरकार से इनपुट टैक्स क्रेडिट ले लिया जाता है।

दिल्ली GST के दूसरे संशोधन विधेयक को LG ने दी मंजूरी
उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने पिछले महीने विधानसभा द्वारा पारित दिल्ली माल और सेवा कर (दूसरा संशोधन) विधेयक 2023 को मंजूरी दे दी है। बुधवार को इस आशय की जानकारी राजनिवास के अधिकारियों ने दी।उन्होंने कहा कि दिल्ली विधानसभा द्वारा पारित विधेयक का उद्देश्य वस्तु एवं सेवा कर के प्रावधानों पर केंद्रीय और राज्य विधानों के बीच एकरूपता सुनिश्चित करना है।
GST परिषद की बैठकों में की गई सिफारिशों के अनुसार, विधेयक में “माल” शब्द और निश्चित समय सीमा और इनपुट टैक्स क्रेडिट का संदर्भ प्रदान करने के लिए दिल्ली माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 में संशोधन किया गया है।

GST परिषद ने अपनी 47वीं, 48वीं और 49वीं बैठक में वित्त अधिनियम, 2023 के माध्यम से केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 के प्रावधानों में विभिन्न संशोधनों की सिफारिश की। उन्होंने बताया कि विधेयक धारा 132 की उप-धारा (एक) में संशोधन करता है ताकि अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया जा सके और आपूर्ति के बिना चालान जारी करने से संबंधित मामलों को छोड़कर, अधिनियम के तहत अपराधों के लिए अभियोजन शुरू करने के लिए वस्तुओं या सेवाओं या दोनों की मौद्रिक सीमा को एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर दो करोड़ रुपये किया जा सके।

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